Corona Effect: ​कामगारों और कच्चे माल की किल्लत, नहीं मिल रहा भुगतान, संकट में प्रयागराज की उत्पादन इकाइयां

औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों को चलाना दूभर हो गया है और वह संकट के दौर में पहुंच गई हैं।

दिवाकर शुक्ला का कहना है कि उनकी इकाई में फैब्रिकेशन का काम होता है। लेकिन लोहा काटने में इस्तेमाल होने वाली आक्सीजन नहीं मिल रही है। महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे महानगरों से कच्चा माल भी नहीं आ पा रहा है। फंड भी बाजार में फंस गया है।

Ankur TripathiWed, 21 Apr 2021 01:31 PM (IST)

प्रयागराज, जेएनएन। फैलते कोरोना संक्रमण के कारण कई राज्यों में लॉकडाउन लग गया है, तो कहीं रात्रिकालीन कर्फ्यू लगा है। इसकी वजह से कच्चे माल के दाम में तेजी से उछाल होने और माल की उपलब्धता में बेहद परेशानी हो रही है। कामगार भी मिलने बंद हो गए हैं। जो कामगार हैं, वह भी संक्रमण अथवा बीमारी की जद में आते जा रहे हैं। थोक व्यापारियों अथवा पार्टियों ने उद्यमियों के भुगतान रोक दिए हैं। इससे औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों को चलाना दूभर हो गया है और वह संकट के दौर में पहुंच गई हैं। 

फैक्ट्रियों में लगातार घट रहा उत्पादन, 10 फीसद तक प्रोडक्शन के दावे

ओम इंजीनियरिंग एंड कंसल्टेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर दिवाकर शुक्ला का कहना है कि उनकी इकाई में फैब्रिकेशन का काम होता है। लेकिन, लोहा काटने में इस्तेमाल होने वाली आक्सीजन नहीं मिल रही है। महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे महानगरों से कच्चा माल भी नहीं आ पा रहा है। फंड भी बाजार में फंस गया है। व्यापारी और पार्टियां भुगतान नहीं कर रही हैं। इससे उत्पादन घटकर करीब 10 फीसद हो गया है। जीतराज कारपोरेशन के डायरेक्टर अजितेश तिवारी का कहना है कि भुगतान बाजार में फंस गया है, नहीं मिल रहा है। दिल्ली, चंडीगढ़ से कच्चा माल आता है लेकिन, लाकडाउन के कारण कच्चा माल नहीं आ रहा है। उद्यमियों और स्टॉफ को भी आने-जाने में दिक्कत है। खतरा और भय इतना ज्यादा है कि कुछ कहना मुश्किल है। उत्पादन गिरकर करीब 10 प्रतिशत पर आ गया है। 

अब आठ घंटे भी नहीं चल रहीं फैक्ट्रियां

स्वास्तिक सर्विसेज के प्रोपराइटर रविनाथ तिवारी का कहना है कि मैन पावर घटकर आधा हो गया है। उत्पादन भी लगभग 50 फीसद रह गया है। साइट पर काम नहीं मिल रहा है। पहले 24 घंटे इकाइयां चलती थीं। अब आठ घंटे भी नहीं चल पा रही हैं। इससे कारोबार एकदम ठंडा पड़ गया है।

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