फूलों की खेती से महक रहा प्रतापगढ़ में समूह की महिलाओं का जीवन, सहालग में अधिक होती है मांग

फूल को निकट के बाजार रानीगंज बादशाहपुर के अलावा वाराणसी जौनपुर अमेठी सुलतानपुर सहित अन्य जिलों में भी फूल डिमांड पर भेजा जाता है। सहालग के मौसम में अधिक मांग रहती हैं। उपायुक्त स्वत रोजगार ने कहा कि स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं विकास की इबारत लिख रहीं हैं।

Brijesh SrivastavaMon, 29 Nov 2021 03:45 PM (IST)
प्रतापगढ़ में स्‍वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं गुलाब, गेंदा, कमल, चमेली आदि की खेती कर रहे हैं।

प्रयागराज, जेएनएन। प्रतापगढ़ की स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। अब गांव की कई और महिलाएं भी अब फूल की खेती करने लगी हैं। अब तो गांव फूल वाली दीदियों के नाम से जाना जाने लगा है। गौरा ब्लाक के भूसलपुर गांव की कमलेश कुमारी इसकी मिसाल हैं। कमलेश गरीब परिवार से थीं। मेहनत मजदूरी करके परिवार का खर्च चलातीं थी। परिवार की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरी तो वह बंटाई पर खेती करने लगीं। रात दिन एक करके फसल उगाने लगीं।

चार माह में फूलों की खेती पटरी पर दौड़ पड़ी

हालांकि खाद, बीज, जोताई व सिंचाई में अधिक पैसा खर्च होने से बचत नहीं हो पा रही थी। ऐसे में वह मजदूरी करना बंद कर दी। कामकाज ठप होने से वह तनाव में रहा करती थी। अक्टूबर 2020 में वह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी। इसके बाद वह घर के पास खाली पड़ी जमीन में गुलाब, गेंदा, कमल, चमेली आदि तरह के फूलों की खेती करने लगीं। हालांकि तीन से चार माह में फूल की खेती पटरी पर दौड़ पड़ी। फूलों की खेती के बदौलत कमलेश समेत कई और महिलाओं का जीवन महकने लगा है।

अन्‍य जनपदों में है यहां के फूलों की मांग

कमलेश बताती हैं कि फूल को निकट के बाजार रानीगंज, बादशाहपुर के अलावा वाराणसी, जौनपुर, अमेठी, सुलतानपुर सहित अन्य जिलों में भी फूल डिमांड पर भेजा जाता है। सहालग के मौसम में इसकी अधिक मांग रहती हैं। उपायुक्त स्वत: रोजगार डा. एनएन मिश्रा ने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं विकास की इबारत लिख रहीं हैं।

मीरा की प्रेरणा लाई रंग

पहले कमलेश यह सोच कर परेशान थी कि आखिर कौन से व्यवसाय शुरू करूं। यह सोचते-सोचते एक माह से अधिक का समय गुजर गया। इसके बाद उन्होंने क्षेत्र के पड़वा नसीरपुर गांव की मीरा यादव से मिलीं और कारोबार शुरू करने की चर्चा की। उन्होंने बताया कि कम पैसे में फूल की खेती करके अच्छी आय कर सकते हैं। इसके बाद कमलेश ने बिना किसी से बात किए खेती करना शुरू कर दिया।

कम पड़ जाता है फूल

इन दिनों सहालग का मौसम चल रहा है। ऐसे में वैवाहिक कार्यक्रम में फूलों की अधिक मांग है। यहां तक कि जिले में वाराणसी आदि जिलों से फूलों की मांग पूरी की जाती है। हालांकि कमलेश के प्रयास से काफी जगहों पर फूल भेजा जाने लगा, लेकिन एक ही दिन में अधिक कार्यक्रम होने से फूलों की खपत होने में दिक्कतें आ रहीं हैं। फिर भी कैसे करके पूरा किया जा रहा है।

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