आत्म मिलन में चुनौतियों पर संतों का मंथन

'आत्म मिलन' में चुनौतियों पर संतों का मंथन

जागरण संवाददाता प्रयागराज चंद दिनों बाद माघी पूíणमा (27 फरवरी) का स्नान पर्व है।

JagranWed, 24 Feb 2021 05:50 AM (IST)

जागरण संवाददाता, प्रयागराज : चंद दिनों बाद माघी पूíणमा (27 फरवरी) का स्नान पर्व है। इसके साथ पौष पूर्णिमा से चल रहा कल्पवास खत्म हो जाएगा। महीनों से मेला क्षेत्र में भजन-पूजन करने वाले संत-महात्मा प्रयागराज से विदा होकर मठ-मंदिरों में चले जाएंगे। विदाई से पहले बुजुर्ग संतों में 'आत्म मिलन' चल रहा है। मुलाकात के दौरान सिर्फ हमउम्र बुजुर्ग महात्मा ही रहते हैं। इसी कारण उसे 'आत्म मिलन' नाम दिया गया है। महात्मा धार्मिक, सांस्कृतिक मुद्दों पर चिंतन कर रहे हैं। साथ ही एक-दूसरे का कुशलक्षेम पूछते हैं, आत्मीयता प्रकट करने के लिए उपहार का आदान-प्रदान कर रहे हैं।

प्रयागराज में संगम तीरे चल रहे माघ मेला में देश के विभिन्न प्रदेशों से महात्मा आते हैं। भजन-पूजन व प्रवचन के जरिए धार्मिक मुद्दों पर चिंतन करते हैं। इसी स्थल पर साल में एक बार अलग-अलग पंथ, परंपरा, मठ व संस्कृति के महात्माओं का एक-दूसरे से मिलन होता है। अखिल भारतीय श्रीपंच तेराह भाई त्यागी के महंत राम संतोषदास बताते हैं कि विश्व में प्रयागराज ऐसा स्थल है जहां माघ मास में एक माह के लिए तमाम विचार व पंथ के संतों का समागम होता है। बुजुर्ग महात्माओं के लिए यह पल खास होता है, क्योंकि सालभर बाद हमें मिलने का मौका मिलता है। यही कारण है कि तपस्या से बचने वाले समय में एक-दूसरे से मेल-मिलाप करते हैं। यह प्रक्रिया वसंत पंचमी से माघी पूर्णिमा के एक दिन पहले तक चलती है। इस दौरान गंगा मइया से कामना होती है कि किसी का शरीर शांत न हो, अगले वर्ष पुन: हमारा मिलन हो। देवरहा बालक बाबा कहते हैं कि आत्ममिलन में आत्मीय चर्चा होती है। धर्म-आध्यात्म को कैसे बढ़ावा दिया जाय? सालभर किन धार्मिक मुद्दों पर काम किया जाएगा, उसका निर्धारण प्रमुख महात्मा आत्म मिलन के दौरान करते हैं।

मिलन से होती है सुखद अनुभूति : हरबंस साहिब

ओम वाहिगुरु ऋषि आश्रम के प्रमुख सद्गुरु संत श्री हरबंस साहिब कहते हैं कि आत्म मिलन महात्माओं को आत्मीय संतुष्टि की अनुभूति कराती है। प्रयागराज में महात्मा दान करने आते हैं। वह दान कई प्रकार का होता है। कोई ज्ञान का दान करता है, कोई भंडारा चलाकर श्रद्धालुओं का पेट भरता है। जबकि, कोई धन का दान करता है। दान का माध्यम अलग-अलग है। लेकिन, उसका मकसद एक जनकल्याण ही होता है। उसे सभी अपनी क्षमता के अनुरूप पूरा करके आगे का लक्ष्य निर्धारित करते हैं।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.