प्रयागराज में अस्‍पताल की चौखट पर वृद्ध मरीज की तड़पकर मौत, चीखती रहीं बेटियां पर नहीं पसीजे डॉक्‍टर

बेली अस्पताल की चौखट पर वृद्ध मरीज तड़पता रहा लेकिन डॉक्‍टर उदासीन रहे। इससे मरीज की मौत हो गई।

बेली अस्पताल में मौजूद चिकित्सा स्टाफ के मुंह मोड़ लेने से 65 वर्षीय एक वृद्ध की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। उनकी दो बेटियां पिता की जान बचाने की गुहार लगाती रहीं। वहां मौजूद म‍ेडिकल स्‍टॉफ मौन बना रहा। चिकित्‍सकों ने उसकी ओर ध्‍यान नहीं दिया।

Brijesh SrivastavaFri, 09 Apr 2021 11:23 AM (IST)

प्रयागराज, जेएनएन। एक ओर कोरोना संक्रमण काल में डॉक्‍टर भगवान का रूप बने हैं। कोरोना मरीजों की देखभाल में दिन-रात लगे हैं। वहीं प्रयागराज में इसका दूसरा पहलू भी दिखा। कुछ डॉक्‍टरों ने मानवता को तार-तार कर दिया। प्रयागराज के बेली अस्‍पताल में गुरुवार की रात वृद्ध की मौत इलाज के अभाव में हो गई। उनकी बेटियां डॉक्‍टरों से गुहार लगाती रहीं, लेकिन डॉक्‍टरों का दिल नहीं पसीजा।

बेली अस्‍पताल में मानवता ने दम तोड़ा

प्रयागराज में कोरोना संक्रमण काफी तेज फैल गया है तो क्या, मानवता ही दम तोड़ देगी? जी हां इन दिनों अस्पतालों में शायद यही हो रहा है। जहां से तड़पते मरीज वापस लौटा दिए जा रहे हैं। गुरुवार रात बेली अस्पताल में मौजूद चिकित्सा स्टाफ के मुंह मोड़ लेने से 65 वर्षीय एक वृद्ध की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। उनकी दो बेटियां पिता की जान बचाने की गुहार लगाती रहीं। रो-रो कर कहती रहीं कि कोई भगवान बनकर आ जाए, उनके पिता को बचा ले। हालांकि सब प्रयास बेकार रहा। बाद में जब अधिकारी आए तब तक बहुत देर हो चुकी थी, वृद्ध अस्पताल की चौखट पर दम तोड़ चुका था।

राजापुर के राजेंद्र को सांस की दिक्‍कत व बुखार था

राजापुर निवासी राजेंद्र प्रसाद पांडेय (65) पुत्र बिहारी लाल पांडेय, को सांस लेने में दिक्कत थी और बुखार से पीडि़त होने पर स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में गुरुवार दोपहर दिखाया गया। वहां राजेंद्र की कोरोना जांच की गई लेकिन रिपोर्ट नहीं बताई गई। बेटी ने बताया कि स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल से उन्हें बेली अस्पताल भेजा गया। इस बीच वह पिता की जान बचाने के लिए उन्हें एक निजी अस्पताल भी ले गईं लेकिन वहां भी बिना कोरोना जांच रिपोर्ट के भर्ती करने से मना कर दिया गया। हालांकि वहां सैंपल जरूर लिया गया।

बुजुर्ग को मेडिकल स्टाफ ने नहीं भर्ती किया

देर रात जब वह फिर से पिता को लेकर बेली अस्पताल पहुंची तो उन्हें अंदर गेट पर ही रोक दिया गया। बेटी मेडिकल स्टाफ से बार-बार कहती रही कि दो घंटे के लिए ही पिता को भर्ती कर लिया जाए। उन्हें आक्सीजन की जरूरत है लेकिन वहां मौजूद स्टाफ ने एक नहीं सुनीं। बल्कि उसे गेट के बाहर बैठा दिया। इसके बाद भी वह एंबुलेंस के आगे आकर उससे मिन्नते कीं लेकिन सब बेकार गया। अस्पताल की चौखट पर ही आखिर राजेंद्र प्रसाद का दम उखड़ गया।

 

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