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Yoga Guru Anand Giri निष्‍कासन प्रकरण, प्रयागराज में हनुमान मंदिर में चढ़ावे पर हाथ मारने लगे थे!

योग गुरु का निरंजनी अखाड़े से निलंबन की वजह बांध स्थित हनुमान मंदिर में चढ़ावा भी माना जा रहा है।

आरोप है कि इसी चढ़ावे से योग गुरु आनंद गिरि अपने परिवार का खजाना भरने लगे थे। हरिद्वार में पंच परमेश्वर की हुई बैठक और इनके द्वारा जांच में यह शिकायतें सही पाई गईं। इसके बाद ही कार्रवाई का निर्णय लिया गया।

Brijesh SrivastavaSat, 15 May 2021 01:05 PM (IST)

प्रयागराज, जेएनएन। प्रयागराज में संगम तीरे विश्‍वविख्‍यात हनुमान मंदिर में आने वाला चढ़ावा भी महंत नरेंद्र गिरि और योग गुरु आनंद गिरि के बीच रार की बड़ी वजह माना जा रहा है। मंदिर के व्यवस्थापक आनंद गिरि 'छोटे महराज' के रूप में जाने जाते रहे हैं। उन्हीं की देखरेख में मंदिर का पूरी तरह से संचालन होता रहा है। महंत नरेंद्र गिरि की मानें तो आनंद गिरि प्रत्येक दिन चढ़ावे पर भी हाथ मारने लगे थे। उस धन का दुरुपयोग करते थे और अपने परिवार के लोगों की उससे संपत्ति बढ़ा रहे थे। इसकी शिकायत महंत नरेंद्र गिरि ने निरंजनी अखाड़े को भेजे गए पत्र में भी की थी।

त्रिवेणी बांध स्थित लेटे हनुमान मंदिर में चढ़ावा

ज्ञात हो कि त्रिवेणी बांध स्थित लेटे हनुमान मंदिर में देश-विदेश से आने वाले भक्तों में बड़े व्यापारी, अफसरान, राजनेता, अभिनेता और अन्य क्षेत्रों के पूंजी व प्रभावशाली लोग भी हैं। इनके द्वारा भी चढ़ावे के रूप में गुप्तदान किया जाता है। दैनिक भक्त, माघ मेला व कुंभ मेले में भी चढ़ावा आता रहा है। आरोप है कि इसी चढ़ावे से आनंद गिरि अपने परिवार का खजाना भरने लगे थे। हरिद्वार में पंच परमेश्वर की हुई बैठक और इनके द्वारा जांच में यह शिकायतें सही पाई गईं। इसके बाद ही कार्रवाई का निर्णय लिया गया।

महंत हरि गिरि ने किया अखाड़ा परिषद का समर्थन

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने स्पष्ट रूप से अखाड़ा परिषद द्वारा हुई कार्रवाई का समर्थन किया है। कहा कि सजा अपराध पर दी गई है, व्यक्ति भविष्य में क्या करता है यह उस पर निर्भर करेगा। आनंद गिरि संन्यासी के रूप में रहेंगे या नहीं इस पर वे अभी कुछ नहीं कह सकते। यह भी कहा कि आनंद गिरि का भी अच्छा खासा प्रभाव है। अधिकांश न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, नेता, अभिनेता आनंद गिरि के पास ही आते थे, उन्हें सभी मानते हैं लेकिन इसके पीछे बड़ा प्रभाव तो महंत नरेंद्र गिरि का ही है। उन्हीं की छत्रछाया में आनंद गिरि ने देश दुनिया में नाम कमाया।

आनंद गिरि का निरंजनी अखाड़ा से निष्‍कासन

आनंद गिरि को निरंजनी अखाड़ा से निष्कासित कर दिया गया है। गुरु नरेंद्र गिरि ने भी मठ बाघम्‍बरी गद्दी व बड़े हनुमान मंदिर से उन्हें अलग कर दिया है। मठ से जुड़े लोग इसके पीछे आनंद गिरि की महत्वकांक्षा को प्रमुख कारण बता रहे हैं।

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