अब नोटिस और आदेश बगैर वाणिज्य कर अफसर कर सकेंगे व्यापारियों के खाते सीज

ज्यादा आइटीसी लेने वाले व्यापारियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए व्यवस्था में बदलाव-वाणिज्यकर कमिश्नर ने जारी किया सर्कुलर इससे तेज हो सकेगी वसूली की कार्रवाई खाता सीज करने के बाद अफसरों को व्यापारी को नोटिस जारी कर इसका कारण बताना होगा।

Ankur TripathiSun, 28 Nov 2021 02:21 PM (IST)
अफसर व्यापारियों का बैंक खाता नोटिस और आदेश जारी किए बगैर सीज (ब्लाक) कर सकेंगे।

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। गलत तरीके से ज्यादा इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) लेने वाले व्यापारियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने के लिए वाणिज्यकर विभाग (स्टेट जीएसटी) ने व्यवस्था में बदलाव किया है। इसके लिए विभागीय अफसरों काे अब ज्यादा अधिकार दिए गए। अफसर ऐसे व्यापारियों का बैंक खाता नोटिस और आदेश जारी किए बगैर सीज (ब्लाक) कर सकेंगे। हालांकि, खाता सीज करने के बाद अफसरों को व्यापारी को नोटिस जारी कर इसका कारण बताना होगा।

पहले कार्रवाई में लग जाते थे छह महीने

ज्यादा आइटीसी क्लेम करने पर उसकी वसूली (रिकवरी) के लिए जो व्यवस्था थी, उसके तहत अफसरों द्वारा व्यापारी को पहले नोटिस भेजा जाता था। उसका जवाब न देने अथवा जवाब संतोषजनक न होने पर वसूली आदेश पारित किया जाता था। उसके 30 दिन के अंदर व्यापारी द्वारा अतिरिक्त धनराशि न लौटाने पर बैंक खाता सीज करने की कार्रवाई की जाती थी। इन कार्रवाइयों में अफसरों को करीब पांच से छह महीने लगता था। इस दौरान तमाम व्यापारियों द्वारा खाते खाली कर लिए जाते थे, जिससे विभाग के हाथ कुछ नहीं लगता था। लेकिन, अब ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के मकसद से वाणिज्यकर कमिश्नर मिनिस्थी एस ने 23 नवंबर को सर्कुलर जारी किया, जिसमें यूपीजीएसटी अधिनियम-2017 की धारा 86ए के तहत अब असिस्टेंट कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर, ज्वाइंट कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर को व्यापारी के खाते सीधे ब्लाक करने का अधिकार दिया गया है। पहले इस धारा में बगैर नोटिस खाता सीज करने का अधिकार सिर्फ कमिश्नर को था। बता दें कि प्रयागराज जोन के 873 व्यापारियों द्वारा वर्ष 2017-18 में ज्यादा आइटीसी लेने की सूची पिछले दिनों मुख्यालय से भेजी गई। एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-वन डीएस तिवारी का कहना है कि जो निर्देश है, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। खाते सीधे ब्लाक करने की प्रक्रिया से वसूली में तेजी आएगी।

कितनी धनराशि तक कौन से अधिकारी कर सकेंगे सीज

एक करोड़- डिप्टी कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर

एक करोड़ से ज्यादा और पांच करोड़ से कम- ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) और ज्वाइंट कमिश्नर (कारपोरेट सर्किल)

पांच करोड़ से ज्यादा- एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-वन

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