न डाक्टर और न सुविधा इसलिए प्रतापगढ़ के इस अस्पताल में आने पर मरीजों में रहती है दुविधा

रानीगंज सीएचसी की व्यवस्था पहले से खराब चल रही थी कोविड 19 के बाद रही-सही कसर भी पूरी हो गई। अस्पताल में एक्स-रे मशीन खराब पड़ी है। अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं हैं जिससे मरीजों को जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। यहां हर रोज करीब डेढ़ सौ ओपीडी होती है

Ankur TripathiThu, 29 Jul 2021 06:30 PM (IST)
रानीगंज में 30 बेड की सीएचसी में दवाओं का अभाव, नहीं मिलते डाक्टर

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। प्रतापगढ़ में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रानीगंज तहसील मुख्यालय का 30 बेड का अस्पताल अव्यवस्था का शिकार है। यहां ना जरूरत के हिसाब से चिकित्सक तैनात किए गए, न ही इलाज के इंतजाम ही ठीक से हो पाए। जरूरत के मुताबिक दवाएं नहीं मिलती। आसपास के इलाके से प्रतिदिन सैकड़ों लोग यहां इलाज के लिए आते हैं और दुविधा के शिकार हो जाते हैं। बिचौलिए इस कदर हावी हैं कि कई मरीज इनके चंगुल में फंसकर ठगी के शिकार हो जाते हैं।

सीएचसी कर्मचारियों को नहीं मिलते मास्क और सैनिटाइजर

रानीगंज सीएचसी की व्यवस्था पहले से खराब चल रही थी, कोविड 19 के बाद रही-सही कसर भी पूरी हो गई। अस्पताल में एक्स-रे मशीन खराब पड़ी है। अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं हैं, जिससे मरीजों को जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। यहां हर रोज करीब डेढ़ सौ से दो सौ ओपीडी होती है। वहीं कोविड 19 से बचाव के लिए सीएचसी व ट्रामा सेंटर में वैक्सीन का टीका लगा रही स्वास्थ्य कर्मचारियों को न तो ग्लब्स मिलता है, ना सैनिटाइजर या मास्क उपलब्ध कराया जाता है। एक कर्मचारी ने बताया कि सीएमओ कार्यालय से सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जा रही है। सीएचसी प्रभारी चाहकर भी भयवश सीएमओ कार्यालय की अव्यवस्था का विरोध नहीं कर पाते, इस वजह से सभी स्वास्थ्यकर्मियों को अपनी जान मुसीबत में डालकर काम करना पड़ रहा है। दैनिक जागरण टीम ने सीएचसी रानीगंज की पड़ताल की तो अस्पताल की व्यवस्था पीएचसी से भी गई-गुजरी दिखी।

सपा सरकार में नए भवन का हुआ था शिलान्यास

वर्ष 1999 में तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री रहे प्रोफेसर शिवाकांत ओझा ने सीएचसी रानीगंज अस्पताल के नये भवन का शिलान्यास किया था, फिर यह अस्पताल 2001 में बनकर तैयार हुआ। इस अस्पताल में न तो बालरोग विशेषज्ञ हैं न फिजीशियन और ना ही रेडियोलॉजिस्ट हैं। वायरल, खांसी जुखाम, पेट दर्द सहित बीमारी के मरीज सीएचसी आते हैं। उनका न तो सही से इलाज हो पाता है और न ही उचित सलाह मिलती है। महिला एवं बालरोग, हड्डी रोग विशेषज्ञ के ना होने से इलाज के लिए मरीजों को जिला अस्पताल भागना पड़ता है। यहां छोटा एक्सीडेंट होने पर भी घायलों को मरहम पट्टी करके जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।

मरीजों का छलका दर्द

तिवारीपुर की पूनम अपने बच्चे को लेकर सीएचसी रानीगंज आई थी। बालरोग विशेषज्ञ के ना होने से लौट गई। संडौरा की फातिमा महिला डाक्टर को दिखाने आई थी, लेकिन महिला डाक्टर के ना बैठने से वह वापस घर लौट गई। अमहटा की सीता देवी एक्स-रे कराने आई थी, उन्हें जिला अस्पताल जाने की सलाह दी गई। संडिला की रेखा महिला डाक्टर को दिखाने आई लेकिन नहीं दिखा सकी।

इन विशेषज्ञों की है कमी

सीएचसी रानीगंज में फिजीशियन सर्जन, बालरोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, एनीथिशिया आंख रोग विशेषज्ञ, मेडिकल अफसर सहित कई पद सृजित हैं, लेकिन किसी की तैनाती नहीं हो पायी है।

अधीक्षक का यह है कहना

सीएचसी रानीगंज में मरीजों का उपचार किया जा रहा है। दवाओं की कमी नहीं है। बालरोग विशेषज्ञ, सर्जन फिजीशियन, रेडियोलॉजिस्ट एवं महिला रोग विशेषज्ञ की कमी है। कमियों को तत्काल ठीक करने की कोशिश की जाती है।

- डा. रजनीश प्रियदर्शी, अधीक्षक सीएचसी रानीगंज

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