MNREGA: प्रतापगढ़ के ​​​​​116 गांवों में ठप है मनरेगा का काम, श्रमिक हो गए बेरोजगार

कई ब्लाक की 116 ग्राम पंचायतों में मनरेगा का कार्य ठप पड़ा है। गांव में मनरेगा से चकरोड भूमि का समतलीकरण तालाब का बंधा निर्माण सहित अन्य कार्य नहीं होने से मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। रोजगार नहीं मिलने से उनकी आय नहीं हो रही है।

Ankur TripathiTue, 21 Sep 2021 04:00 AM (IST)
रोजगार नहीं मिलने से संकट से गुजर रहा परिवार, मनरेगा की बजाय दूसरे काम की चल रही तलाश

प्रतापगढ़, जागरण संवाददाता। मनरेगा मजदूरों को 100 दिन रोजगार देने का दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। काम नहीं मिलने से मजदूरों का परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। आय नहीं होने से उनके बच्चों की फीस और घर का खर्च नहीं चल पा रहा है। गांव के प्रधान के यहां चक्कर लगाने के बाद भी उनको रोजगार नहीं दिया गया। अब वह इसकी उम्मीद ही छोड़ चुके हैं। दूसरे काम की तलाश में है। कई लोगों ने कुछ और काम भी शुरू भी कर दिया है।

लंबे समय से नहीं कराया जा रहा कोई काम

प्रतापगढ़ में 17 ब्लाक हैं। इसके तहत एक हजार 193 ग्राम पंचायतें हैं। करीब एक लाख 35 हजार मनरेगा मजदूर हैं। सदर, मानधाता, संडवा चंद्रिका सहित कई ब्लाक की 116 ग्राम पंचायतों में मनरेगा का कार्य ठप पड़ा है। गांव में मनरेगा से चकरोड, भूमि का समतलीकरण, तालाब का बंधा निर्माण सहित अन्य कार्य नहीं होने से मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। रोजगार नहीं मिलने से उनकी आय नहीं हो रही है। ऐसे में उनका परिवार संकट से गुजर रहा है।

मुश्किल हो गया परिवार का पेट भरना

मानधाता ब्लाक की ग्राम पंचायत भरतपुर बआपुर गांव में दैनिक जागरण की टीम पहुंची। मनरेगा मजदूरों ने अपनी पीड़ा बताई। रोजगार न मिलने से उनका परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया है। वह किसी तरह से अपने परिवार का जीवन यापन कर रहे हैं। इस तरह से कई और गांव हैं जहां मजदूर काम की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। प्रधान व सचिव उनको रोजगार नहीं दिला पा रहे हैं। डीसी मनरेगा डा. एनएन मिश्रा ने बताया कि जिन गांवों में मनरेगा मजदूरों को रोजगार नहीं दिया जाएगा। संबंधित गांव के सचिव समेत के विरुद्ध कड़ा कदम उठाया जाएगा।

बोले मनरेगा मजदूर

कई माह से मनरेगा से रोजगार नहीं दिया जा रहा है। आय न होने से परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। परिवार तनाव में है।

- ओम प्रकाश

साल भर में 100 दिन रोजगार देने का दावा सरकार कर रही है। गांव में तो कई दिनों से काम नहीं मिला। प्रधान भी नजरअंदाज कर रहे हैं।

- राम अंजोर सरोज

पांच साल पहले मनरेगा से काम मिला था। उस दौरान मेठ के तौर पर काम कर रहे थे। अब काम न मिलने से दूसरी जगह पर राजगीर के तौर पर काम करने लगे।

- श्रीराम सरोज

-कई माह तक इंतजार किए, लेकिन जब मनरेगा से काम नहीं मिला तो अंत में बढ़ई का काम शुरू करने का निर्णय लिए। कागजों में रोजगार दिया जा रहा है।

- बृजलाल

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