महर्षि वाल्मीकि जयंती: प्रयागराज के मंदिरों में रामायण पाठ और फिर गंगा में दीपदान

महर्षि वाल्मीकि जयंती के मौके पर ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर बालिका इंटर कालेज सुभाषनगर में उनके चित्र पर दीपार्चन व पुष्पार्चन हुआ। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता आचार्य नीलम शर्मा ने कहा कि वाल्मीकि हमारे देश के संस्कृत के महानतम कवियों में से एक हैं।

Ankur TripathiThu, 21 Oct 2021 08:30 AM (IST)
प्रयागराज में धूमधाम से मनाई गई महर्षि वाल्मीकि की जयंती

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। महर्षि वाल्मीकि की जयंती बुधवार को धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर जिला प्रशासन की ओर से चार मंदिरों में दीप प्रज्जवलन, भजन एवं वाल्मीकि रामायण का पाठ कराया गया। श्रृंगवेरपुर धाम, भरद्वाज आश्रम, लेटे हनुमान जी, छुहारा हनुमान मंदिर में वाल्मीकि रामायण का पाठ हुआ। शाम को दीपदान में लोगों की भीड़ रही। कार्यक्रम में एडीएम सिटी मदन कुमार, पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह, डा. कंचन, क्षेत्रीय संस्कृति अधिकारी गुलाम सरवर, एसीएम द्वितीय प्रेमचंद्र मौर्य आदि थे।

वाल्मीकि संस्कृत के महानतम कवियों में से एक

महर्षि वाल्मीकि जयंती के मौके पर ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर बालिका इंटर कालेज सुभाषनगर में उनके चित्र पर दीपार्चन व पुष्पार्चन हुआ। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता आचार्य नीलम शर्मा ने कहा कि वाल्मीकि हमारे देश के संस्कृत के महानतम कवियों में से एक हैं। उन्हें हम सब को नमन करना चाहिए। प्रधानाचार्य मीना श्रीवास्तव ने ने बताया कि शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ गरुड़ पर बैठकर पृथ्वी लोक में भ्रमण के लिए आती हैं। इस अवसर पर संतोष सेठ, मांडवी तिवारी, सुगंधा सिंह, जयराम यादव, रेखा सिंह, सरिता सिंह, अंकिता मिश्रा, सोमनाथ त्रिपाठी, रंजीत यादव आदि मौजूद रहे। इसी क्रम में शिव चरण दास कन्हैया लाल इंटर कॉलेज में भी महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई गई। इस दौरान प्रधानाचार्य लाल चंद्र पाठक, धर्मवीर सिंह, धर्मवीर प्रसाद, प्रवीण पांडेय, अंकित पटेल, अनुज आदि मौजूद रहे।

विद्यार्थियों ने मनाई नारायण जयंती

प्रयागराज : श्री नारायण आश्रम परिसर में ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 नारायण महाप्रभु का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। श्री महाप्रभु पब्लिक स्कूल के शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने वर्तमान पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 गिरधर नारायण महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया व समाधि स्थल तक बधावा के साथ नाचते गाते पहुंचे। विद्यालय के विद्यार्थियों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का ध्यान आकषिर्त किया। इस दौरान संत शिवाजी, संत गोपी, संत स्मृति के अतिरिक्त प्रधानाचार्य रविंदर बिरदी भी मौजूद रहीं।

महर्षि वाल्मीकि लौकिक संस्कृत के जनक थे

प्रयागराज : नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय के ज्योतिष, कर्मकांड, वास्तुशास्त्र एवं संस्कृत विभाग की तरफ से बुधवार को महर्षि वाल्मीकि की जयंती मनाई गई। अध्यक्षता कर रहे डा. रमेश चन्द्र मिश्र ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि लौकिक संस्कृत के जनक थे। उनके मुख से बीज रूप में निकला प्रथम श्लोक ही महाकाव्य का मूलमंत्र बना। संस्कृत से कई भाषाएं जैसे हिन्दी, पंजाबी, बंगला, मराठी आदि उत्पन्न हुईं। छात्र अब इस भाषा को कैरियर बनाने के लिए भी चुनने लगें है। विशिष्ट अतिथि डा. बीरेंद्र मणि त्रिपाठी ने महर्षि वाल्मीकि के जीवनवृत्त पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता डा. अरविन्द शुक्ल ने वाल्मीकि रामायण के उदाहरणों द्वारा तत्कालीन और आधुनिक समाज की तुलना करते हुए आधुनिक समाज में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों को उद्घाटित किया। संचालन डा. प्रभात कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन संस्कृत विभागाध्यक्ष डा. देव नारायण पाठक ने किया। इस दौरान डा. प्रबुद्ध मिश्र, डा. संजय भारती, डा. अभिषेक त्रिपाठी, डा. संतोष शुक्ल आदि उपस्थित रहे।

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