Mahant Narendra Giri: श्रीमठ बाघम्‍बरी गद्दी में आंसुओं की बही गंगा, महंत की याद में फूट-फूटकर रोए भक्‍त

Mahant Narendra Giri आज अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्‍यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को भू समाधि दे दी गई। इस दौरान अंतिम क्रिया की तैयारी करने वाले शिष्‍यों की आंखों में पानी था। भू समाधि के दौरान कई तो फूट-फूटकर रोते रहे।

Brijesh SrivastavaWed, 22 Sep 2021 04:25 PM (IST)
महंत नरेंद्र गिरि के शिष्‍यों की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे हैं। वे गमगीन हैं।

प्रयागराज, जेएनएन। श्रीमठ बाघम्‍बरी गद्दी। जी हां, यह वही मठ है जिसमें महंत नरेंद्र गिरि के कदम पड़ते थे तो सैकड़ों की संख्‍या में शिष्‍य उन्‍हें घेर लेते थे। एक-एक कर उनके पांव छूकर आशीर्वाद लेने को वह लाला‍यित रहते थे। पिछले तीन दिनों से यहां का माहौल ही बदला है। मठ में रहने वाले शिष्‍यों को न भूख की चिंता है और न ही प्‍यास की आस। बस उनकी आंखों से अनवरत आंसू ही निकल रहे हैं। वही गुरुजी जो उनके सुख-दुख में सदैव ख्‍याल रखते थे, आज बेजान हो चुके हैं। कई शिष्‍य महंत के शव रखे कमरे के बाहर तो कई बरामदे आदि में गमगीन हैं। 

आज अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्‍यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को भू समाधि दे दी गई। इस दौरान अंतिम क्रिया की तैयारी करने वाले शिष्‍यों की आंखों में पानी था। भू समाधि के दौरान कई तो फूट-फूटकर रोते रहे। मानों उनका अपना सगा संबंधी उनसे दूर हो गया है। शिष्‍य बताते हैं कि महंत नरेंद्र गिरि उनके अभिभावक थे। उनके सुख-दुख में सहायक थे। उनका ध्‍यान रखते थे लेकिन अफसोस कि वे अब उनके बीच नहीं रहे।

महंत नरेंद्र गिरि के ब्रह्मलीन होने पर हर कोई स्तब्ध है। उनके शिष्‍यों में आक्रोश भी है। अपने गुरु को अंतिम बार देखने की लालसा उन्‍हें दूर-दूर से यहां खींच लाई थी। महंत के अंतिम दर्शन के लिए आए भक्तों के जोश के सामने कहीं ठहर नहीं रही थी। लोग तेज धूप की चिंता किए बिना मठ तक पैदल आ रहे थे। जब तक उन्होंने गुरु का अंतिम दर्शन नहीं कर लिया, तब तक वहीं पर डटे रहे। न उन्हें भूख ने सताया और न ही प्लास लगी।  

हंडिया से आए राम मनोहर ने बताया कि उन्हें मंगलवारइ सुबह महंत जी के ब्रह्मलीन होने की जानकारी मिली तो वह उसके बाद प्रयागराज के लिए चल दिए। झलवा से आए सुरेश ने बताया कि रास्ते में बैरिकेडिंग होने के कारण मठ तक पैदल आना पड़ा। धूप तेज थी। मगर उनके कदम बस बढ़ते ही जा रहे थे। महंत के अंतिम दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग प्रयागराज आए। देर शाम तक लोगों ने दर्शन किया।

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