महंत के कथित सुसाइड नोट में उत्तराधिकारी का नाम होने के बाद भी बलबीर गिरि की ताजपोशी तय नहीं

Mahant Narendra Giri Death News प्रयागराज में श्री मठ श्री मठ बाघम्बरी गद्दी में अब स्वर्गीय नरेन्द्र गिरि का उत्तराधिकारी कौन होगा इसे लेकर पेच फंस सकता है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अब तक इस बात से सहमत नहीं हो सका है कि कथित सुसाइड नोट नरेंद्र गिरि का है।

Dharmendra PandeyThu, 23 Sep 2021 03:09 PM (IST)
भले ही बलबीर गिरि को उत्तराधिकारी घोषित करने की बात लिखी गई है, लेकिन अखाड़ा परिषद अभी एकमत नहीं

प्रयागराज, जेएनएन। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वर्गीय महंत नरेन्द्र गिरि की संदिग्ध मौत के प्रकरण की जांच भले ही सीबीआइ करेगी, लेकिन उनके उत्तराधिकारी का नाम तो अखाड़ा परिषद ही तय करेगा। महंत नरेन्द्र गिरि की संदिग्ध मौत के बाद कमरे में मिले कथित सुसाइड नोट में भले ही बलबीर गिरि को उत्तराधिकारी घोषित करने की बात लिखी गई है, लेकिन इस नाम पर अखाड़ा परिषद अभी एकमत नहीं है।

प्रयागराज में श्री मठ श्री मठ बाघम्बरी गद्दी में अब स्वर्गीय नरेन्द्र गिरि का उत्तराधिकारी कौन होगा, इसे लेकर पेच फंस सकता है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अब तक इस बात से सहमत नहीं हो सका है कि कथित सुसाइड नोट नरेंद्र गिरि का ही है। उधर महंंत नरेन्द्र गिरि के प्रिय शिष्य रहे बलवीर गिरि का भी कहना है कि वह तो अभी मठ के उत्तराधिकारी नहीं है। प्रयागराज में पंच परमेश्वर की बैठक में जिसके नाम पर मुहर लगेगी, इसे स्वीकार करने की बात बलवीर गिरि ने की है। फिलहाल पंच परमेश्वर की बैठक कब होगी, अभी यह साफ नहीं है। अब तो निरंजनी अखाड़ा ही इस बात को तय करेगा। महंत नरेन्द्र गिरि ही निरंजनी अखाड़ा के सचिव भी थे। अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि व सचिव निरंजनी अखाड़ा रवींद्र पुरी ही अब उत्तराधिकारी के लिए पंच परमेश्वर की बैठक की तिथि तथा स्थान तय करेंगे।

बलबीर गिरि बीते 15 वर्ष से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में सक्रिय हैं। स्वामी आनंद गिरि से महंत नरेन्द्र गिरि के नाराज होने के बाद से ही बलबीर गिरि ही उनके सबसे प्रिय शिष्य थे। महंत ने अपने कथित सुसाइड नोट में भी लिखा है कि प्रिय बलवीर गिरि। मैंने तुम्हारे नाम एक रजिस्टर वसीयत की है। इसमें मेरे ब्रह्मलीन हो जाने के बाद तुम बड़े हनुमान मंदिर एवं मठ बाघंबरी गद्दी के महंत बनोगे। तुमसे मेरा एक अनुरोध है कि मेरी सेवा में लगे विद्यार्थियों का ध्यान रखना।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि की बीती 20 तारीख संदिग्ध मौत हो गई। उन्हेंं बुधवार बाघम्बरी मठ में भू-समाधि दी गई। इस दौरान अंतिम संस्कार के सभी कार्य को बलबीर गिरि ने पूरा किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को जब महंत नरेन्द्र गिरि को श्रद्धांजलि देने जब प्रयागराज आए थे तो उन्होंने बलवीर गिरि से बातचीत की थी। बलवीर गिरि सीएम योगी आदित्यनाथ की बगल में बैठे थे।

निरंजनी अखाड़े के उप महंत

बलवीर गिरि इस समय निरंजनी अखाड़े के उपमहंत हैं। वह हरिद्वार में बिल्केश्वर महादेव मंदिर की व्यवस्था का संचालन देखते हैं। बलवीर 1998 में निरंजनी अखाड़े के सम्पर्क में आए थे। इसके बाद 2001 में उनका सम्पर्क महंत नरेंद्र गिरि से हो गया। उस समय नरेन्द्र गिरि भी निरंजनी अखाड़े के कारोबारी महंत थे। उनसे दीक्षा ग्रहण कर बलवीर उनके शिष्य हो गए। बलवीर गिरि उत्तराखंड के हैं। वह 2005 में संत बने थे और 2019 से बिल्केश्वर महादेव मंदिर की व्यवस्था देख रहे हैं। महंत नरेन्द्र गिरि ने बलबीर गिरि को ही हरिद्वार आश्रम का प्रभारी बनाया था। इन्हीं बलबीर गिरि को महंत नरेन्द्र गिरि ने अपना उत्तराधिकारी भी घोषित किया। ï

नरेन्द्र गिरि करते थे बड़ा भरोसा

नरेन्द्र गिरि उन पर इतना विश्वास करते थे कि कुंभ और बड़े पर्व के दौरान निरंजनी अखाड़े और बाघम्बरी मठ की ओर से खर्च के लिए आने वाले लाखों रुपये उनके पास ही रखते थे। उन्हीं की देखरेख में खर्चा किया जाता था।

फिलहाल बलबीर की ताजपोशी तय नहीं

निरंजनी अखाड़ा के प्रमुख रविंद्र पुरी ने कहा कि यह तो स्पष्ट है कि सुसाइड नोट का पत्र महंत नरेन्द्र गिरि ने नहीं लिखा है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद का फैसला अब 16 दिन बाद ही होगा। अखाड़ा परिषद के महासचिव महंत हरी गिरि महाराज ने बलवीर गिरि पर सवाल उठाते हुए कहा कि वो ऐसे कैसे अध्यक्ष बन जाएंगे। यह फैसला अखाड़े का है और सर्वसम्मति से फैसला लिया जाएगा। 

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