माफिया मुख्तार की अर्जी खारिज, रुंगटा अपहरण कांड के वादी को विस्फोट से उड़ाने की धमकी का केस

24 वर्ष पुराने नंदकिशोर रुंगटा अपहरण कांड के वादी को विस्फोटक से उड़ा देने की धमकी देने का आरोप है। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश आलोक कुमार श्रीवास्तव ने अभियोजन पक्ष की ओर से राजेश कुमार गुप्ता और मुख्तार अंसारी के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने के पश्चात दिया

Ankur TripathiFri, 13 Aug 2021 11:30 PM (IST)
हाई कोर्ट ने कहा, लगाए गए आरोप नहीं हैं निराधार, आरोप तय करने का बनता है मामला

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। एमपी/एमएलए स्पेशल कोर्ट ने माफिया मुख्तार अंसारी की अर्जी शुक्रवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि इनके विरुद्ध लगाए गए आरोप निराधार नहीं है। आरोप तय करने का मामला बनता है। 24 वर्ष पुराने नंदकिशोर रुंगटा अपहरण कांड के वादी को विस्फोटक से उड़ा देने की धमकी देने का आरोप है। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश आलोक कुमार श्रीवास्तव ने अभियोजन पक्ष की ओर से राजेश कुमार गुप्ता और मुख्तार अंसारी के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने एवं दौरान विवेचना एकत्र किए गए सबूतों के अवलोकन के पश्चात दिया।

कोर्ट ने कहा, निराधार नहीं प्रतीत होता है आरोप

अदालत ने कहा कि मुख्तार अंसारी के विरुद्ध जो आरोप अभियोजन पक्ष ने आरोप पत्र में लगाए हैं वह निराधार प्रतीत नहीं होते हैं। इसलिए इनके खिलाफ आरोप तय करने का मामला पाया जाता है। वाराणसी जिले के थाना भेलूपुर पर महावीर प्रसाद रुंगटा ने एक दिसंबर 1997 को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पांच नवंबर 1997 को शाम पांच बजे उन्हें टेलीफोन पर धमकी दी गई कि उनके भाई रूपकिशोर रुंगटा जिनका 22 जनवरी 1997 को अपहरण कर लिया गया था, पुलिस का सहयोग करने पर उन्हें भी विस्फोटक से उड़ाने की धमकी दी गई थी। पुलिस ने विवेचना करने के पश्चात न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया। लेकिन इस मामले में आरोप तय नहीं हो सका था।

झूठा फंसाने की दलील दी माफिया ने

मुख्तार अंसारी की ओर से इस मामले में डिस्चार्ज करने का प्रार्थना पत्र दिया गया था, जिस पर न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात खारिज कर दिया। जबकि मुख्तार अंसारी की ओर से अदालत में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में यह आधार दिया गया था कि वह बसपा के विधायक हैं और उनके विरोधी पार्टी की सरकार है। इसलिए झूठा फंसा दिया गया है। टेलीफोन से धमकी देने के आरोप पर ही पूरा मुकदमा आधारित है, लेकिन मुकदमा में कोई भी गवाह नहीं बनाया गया है। किस टेलीफोन नंबर से धमकी दी गई थी, इसका भी कोई उल्लेख नहीं है। मुकदमा 25 दिन विलंब से दर्ज कराया गया है। इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। सभी आरोप झूठे और निराधार हैं। इसलिए उन्हें डिस्चार्ज कर मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी जाए।

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