मरीजों की सेवा के लिए परिवार से दूरी, कोविड ड्यूटी के दौरान ​​​​21 दिन तक बेटियों से वीडियो कॉल पर ही बात

मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज में पैथालाजी प्रोफेसर कचनार वर्मा बताती हैं कि कोविड अस्पताल में डयूटी करना चिकित्सा सेवा में एक अलग तरह का अनुभव रहा। वहां उन मरीजों को अपनापन देते हुए उनकी सभी जिज्ञासाओं को बड़ी संवेदना से शांत करना होता है

Ankur TripathiWed, 16 Jun 2021 07:00 AM (IST)
डॉक्टरों और नर्सों को कोविड वार्ड में ड्यूटी के दौरान परिवार से भी दूरी बनाकर रखनी पड़ी

प्रयागराज, जेएनएन। कोरोना की पहली के बाद दूसरी लहर जितनी मारक रही उतनी ही फ्रंट लाइन पर काम करने वाले लोगों जैसे हेल्थ वर्कर, डॉक्टर, नर्स, पुलिस के लिए मुश्किल भरे। खासतौर पर डॉक्टरों और नर्सों को कोविड वार्ड में ड्यूटी के दौरान परिवार से भी दूरी बनाकर रखनी पड़ी ताकि उन्हें इस महामारी की जद में आने से बचाया जा सके। इस दौरान फोन पर ही बात हो पा रही थी या फिर वीडियो कॉल से संपर्क। ऐसे डाक्टरों से बात की गई तो कोविड ड्यूटी के दौरान के मुश्किल वक्त का अहसास सामने आया।

घर जाते ही एक कमरे में क्वारंटाइन

मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज में पैथालाजी प्रोफेसर कचनार वर्मा बताती हैं कि कोविड अस्पताल में डयूटी करना चिकित्सा सेवा में एक अलग तरह का अनुभव रहा। वहां उन मरीजों को अपनापन देते हुए उनकी सभी जिज्ञासाओं को बड़ी संवेदना से शांत करना होता है जिसमें मरीज कभी अपना सीटी स्कैन दिखाते हुए अपनी हालत पूछता है कभी आइसीयू में मानीटर की ओर देखकर उसका मन घबराता है। मुझे एक महिला मरीज की वह बात याद है जिसमें उसने कहा था कि तीन-चार दिन में ठीक होकर घर जाऊंगी तो आपको भी बुलाऊंगी। उधर मरीजों को सकारात्मक बातेें करते हुए उम्मीद से बांधे रखना पड़ता है और दूसरी ओर घर में बच्चे व बुजुर्ग लोग भी हैं। उन्हें भी देखना है। फिलहाल जब तक मेरी कोविड ड्यूटी रही दो बेटियां घर से मुझे पूरा सपोर्ट करती रहीं। 21 दिनों तक मैं बेटियों से आमने सामने नहीं मिल पाई। घर में जाते ही एक कमरे में क्वारंटाइन हो जाती थी। बेटियों से वीडियो कॉल करके ही बात होती थी। इस बीच बेटियों को भी नया प्रशिक्षण मिला। काफी कुछ काम बेटियां अपने आप से करना सीख गईं। घर जाने पर इतनी सावधानी बरतनी होती है कि कहीं बच्चे और बुजुर्ग पर हमसे कोई दुष्प्रभाव न पड़े। अस्पताल में स्वयं को भी सुरक्षित रखना होता है। हां, यह जरूर है कि मरीज के स्वस्थ होकर डिस्चार्ज होने पर हमें भी संतुष्टि मिलती है।

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