Allahabad University की तर्ज पर कालेजों में शोधार्थियों को मिले फेलोशिप, शिक्षक संघ की बैठक में उठा मसला

आक्टा अध्यक्ष डाक्टर एसपी सिंह ने बताया कि महाविद्यालयों की ओर से शोध कराने की अनुमति के लिए आवेदन किया गया था। हालांकि इविवि प्रशासन की ओर से गठित चार सदस्यीय प्राध्यापकों की समिति ने जो मानकीय प्रारूप भेजा।

Ankur TripathiSat, 31 Jul 2021 06:40 AM (IST)
दीक्षा समारोह से कालेजों के मेधावियों को वंचित किए जाने पर जताई नाराजगी

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। इलाहाबाद विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ (आक्टा) ने इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (इविवि) की तर्ज पर संघटक महाविद्यालयों में शोध करने वाले छात्र-छात्राओं को फेलोशिप देने की मांग उठाई है। इसका लाभ कालेज के शोधार्थियों को नहीं मिलने पर आपत्ति जताई है। चौधरी महादेव प्रसाद पीजी कालेज (सीएमपी) में हुई कार्यकारिणी की बैठक में सदस्यों ने सहमति जताई है।

महाविद्यालयों में भी इसका लाभ मिलना चाहिए

आक्टा अध्यक्ष डाक्टर एसपी सिंह ने बताया कि महाविद्यालयों की ओर से शोध कराने की अनुमति के लिए आवेदन किया गया था। हालांकि, इविवि प्रशासन की ओर से गठित चार सदस्यीय प्राध्यापकों की समिति ने जो मानकीय प्रारूप भेजा। वह इविवि ही नहीं, किसी भी विश्वविद्यालय में लागू नहीं हैं। स्वयं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विभागों में भी वह मानक नहीं है। आक्टा ऐसे प्रारूप को अन्यायपूर्ण मानती है। आक्टा अध्यक्ष का कहना है कि संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा (क्रेट) इविवि ही आयोजित करता है। चाहे वह प्रवेश महाविद्यालयों में हों या विश्वविद्यालय में। इस लिहाज से यदि विश्वविद्यालय में शोधार्थी को प्रतिमाह आठ हजार रुपये फेलोशिप दी जाती है तो महाविद्यालयों में भी इसका लाभ मिलना चाहिए। तर्क दिया कि कम मेरिट का विद्यार्थी विश्वविद्यालय में प्रवेश पाकर फेलोशिप पाए और अधिक मेरिट का विद्यार्थी महाविद्यालय में प्रवेश पाकर इससे वंचित कैसे हो। मांग उठाया कि एकेडमिक काउंसिल और कार्य परिषद में यह प्रस्ताव पारित किया जाए। शिक्षकों और कर्मचारियों की सहूलियत के लिए नए डायग्नोस्टिक सेंटर और पैथोलाजी को जोडऩे की मांग की।

पीएचडी इंक्रीमेंट का उठा मसला

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि 18 जुलाई 2018 के यूजीसी रेगुलेशन के अनुसार पीएचडी सहित ज्वाइन करने पर शिक्षकों को पांच वेतन वृद्धि मिलनी है। ज्वाइनिंग के समय देय वेतनमान के अनुरूप ही पीएचडी इंक्रीमेंट भी मिलने चाहिए। जबकि विश्वविद्यालय मनमानी तरीके से छठे वेतनमान के अनुरूप दे रहा है। चूंकि एक जनवरी से 2016 से लागू होने की स्पष्ट बात रेगुलेशन में है। एक जनवरी 2017 के बाद से पीएचडी सहित सेवा शुरू करने वाले प्राध्यापकों को सातवें वेतनमान के अनुरूप ही पीएचडी इंक्रीमेंट भी देना चाहिए।

मेडल पर भी जताई आपत्ति

कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से इस बात पर आपत्ति जताई के इविवि के दीक्षा समारोह से कालेजों के मेधावियों को वंचित किया गया है। मांग की कि उपाधि विश्वविद्यालय देता है। इस लिहाज से विश्वविद्यालय द्वारा 23 सितंबर को प्रस्तावित दीक्षा समारोह में टापर चाहे महाविद्यालय से ही क्यों न हों, उन्हें भी उपाधि दी जानी चाहिए। संपूर्ण विश्वविद्यालयों में यही नियम लागू है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.