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इलाज में धन उगाही से आएं बाज, प्रयागराज में निजी अस्पतालों के नियम उल्लंघन पर नहीं हो पाएगी मदद

साफ है कि अगर निजी अस्पताल मनमानी करते हैं तो बचाव करना मुश्किल होगा।

अप्रैल महीने में कोरोना के केस अचानक बढ़ने पर जब सरकारी अस्पतालों में बेड मिलना मुश्किल हुआ तो निजी अस्पतालों को भी कोविड हॉस्पिटल में तब्दील किया जाने लगा था। लेकिन निजी अस्पताल इलाज से ज्यादा लूट का अड्डा बन गए।

Ankur TripathiMon, 17 May 2021 11:16 AM (IST)

प्रयागराज, जेएनएन। कोविड संकट काल में निजी अस्पतालों की मनमानी और मुकदमा दर्ज होने के बाद इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन ने अस्पताल संचालकों को हिदायत दी है। सचिव डा. राजेश मौर्या ने कहा कि अस्पताल संचालक सरकार से निर्धारित दर के अनुसार ही चिकित्सा खर्च व्यवस्थित करें। जिला प्रशासन से भी सहयोग की अपेक्षा की है। शासन के बाद जिला प्रशासन की ओर से भी चेतावनी जारी की है कि कोरोना मरीजों का उपचार करने में धन उगाही करने से बाज आएं वरना कार्रवाई होगी।

लाखों रुपये वसूलकर रेफऱ करने का भी खेल

अप्रैल महीने में कोरोना के केस अचानक बढ़ने पर जब सरकारी अस्पतालों में बेड मिलना मुश्किल हुआ तो निजी अस्पतालों को भी कोविड हॉस्पिटल में तब्दील किया जाने लगा था। लेकिन निजी अस्पताल इलाज से ज्यादा लूट का अड्डा बन गए। तमाम शिकायत मिलती रही कि तीन दिन भर्ती कर दो-तीन लाख रुपये वसूलकर मरीज को यह कहकर दूसरे अस्पताल ले जान के लिए कहा गया कि वहां हालत में सुधार नहीं हो रहा है। यही नहीं, छह-सात दिन तक इलाज के तीन से पांच लाख रुपये तक का बिल बनाकर मरीजों को पूरी तरह ठीक हुए बिना घर भेजा गया।  निजी अस्पतालों में एक दिन इलाज के 30 से 50 हजार रुपये तक मनमानी धन उगाही की गई। अभी कुछ दिन पहले एक शिक्षक की पत्नी ने डीएम को पत्र लिखकर गुहार लगाई थी कि पति के इलाज में आर्थिक मदद की जाए क्योंकि निजी अस्पताल में पांच लाख रुपये खर्च करने के बाद भी तबीयत अब तक खराब है।

मुकदमा लिखा गया तो मची हलचल

मनमाना बिल उगाही के ही आरोप में तीन रोज पहले जार्जटाउन में ओझा हॉस्पिटल के संचालक डॉ.एलएस ओझा के खिलाफ महामारी अधिनियम समेत अन्य धाराओं में महिला मरीज के पति की शिकायत पर केस लिखा गया था।  इस प्रकरण के बाद इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के सचिव  डा. राजेश मौर्या ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि प्रशासन का सकारात्मक सहयोग नहीं मिलेगा तो कोरोना के विरुद्ध हमारी लड़ाई कमजोर पड़ सकती है। अस्पताल संचालकों से कहा कि सरकार शासन द्वारा निर्धारित मानकों के हिसाब से ही संचालन करें। क्योंकि नियम का पालन न करने पर शासन द्वारा की गई कोई कार्रवाई में कोई एसोसिएशन चाह कर भी मदद नहीं कर सकता है। मरीज के रिश्तेदारों से भी उन्होंने संयम से काम लेने की अपील की। साफ है कि अगर निजी अस्पताल मनमानी करते हैं तो बचाव करना मुश्किल होगा।

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