ठेले पर पढ़ने वाला करन अब बनेगा इंजीनियर, जानें अभाव भरी जिंदगी से सफलता तक की कहानी

करन की सफलता के पीछे शुरुआत संस्थान का अहम रोल है। संस्था के निदेशक अभिषेक शुक्ल कहते हैं संविधान के रचयिता बाबा भीमराव अंबेडकर का सपना था कि हमारे देश में अंतिम स्थान पर खड़े बच्चे को उच्च और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।

Brijesh SrivastavaWed, 01 Dec 2021 01:04 PM (IST)
प्रयागराज के एक ऐसे छात्र की कहानी, जिसने गरीबी में रहकर एक मुकाम को हासिल किया।

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। जेठ की तपती दुपहरी और माघ की कड़कड़ाती ठंड में ठेले पर बैठकर कामयाबी का तानाबाना बुनने वाला करन अब इंजीनियर बनेगा। उसने सफलता की पहली सीढ़ी पर कदम भी रख

दिया है। आइआइटी मेंस में सफलता मिलने के बाद करन का प्रवेश इंडियन इंस्टीट्यूट आफ रूरल टेक्नोलाजी (आइईआरटी) में हुआ है। करन ने 2013 में 10वीं और 2021 में प्रथम श्रेणी में 12वीं की पढ़ाई जीआइसी से पूरी की। इसके पहले प्राथमिक स्तर की पढ़ाई प्रयागराज के अलोपीबाग स्थित प्राइमरी विद्यालय से की।

दो माह पूर्व तोड़ दी गई थी करन की झोपड़ी

करन अपने माता-पिता के साथ अलोपीबाग में झोपड़ी में रहता था। पिता रामू सोनकर सब्जी का ठेला लगाते थे। नशे की वजह से उन्हें बीमारी ने घेर लिया। करन ने बताया कि 2019 में 10वीं की परीक्षा के दौरान सड़क चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा था। इस दौरान उसकी झोपड़ी तोड़ दी गई। इस लिहाज से वह बेघर हो गया। इसके बाद भी उसका हौसला नहीं टूटा और वह पढ़ाई करता रहा।

कोरोना काल में जगत तारन से मां का काम छूटा

करन की मां जगत तारन स्कूल में संविदा पर काम करती थीं। हालांकि, कोरोनाकाल में उन्हें संस्थान से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। घर में करन से छोटा एक भाई और एक बहन है।

परदे के पीछे से अभिषक का रोल

करन की सफलता के पीछे शुरुआत संस्थान का अहम रोल है। संस्था के निदेशक अभिषेक शुक्ल कहते हैं संविधान के रचयिता बाबा भीमराव अंबेडकर का सपना था कि हमारे देश में अंतिम स्थान पर खड़े बच्चे को उच्च और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। उनके ही सपनों को एक रूप देते हुए समाज मे सबसे अंतिम पायदान पर खड़े शुरुआत के बच्चे करन सोनकर का एडमिशन इलाहाबाद के सबसे अच्छे इंजीनियरिंग कालेज में कराया।

इलेक्ट्रानिक कम्युनिकेशन से पढ़ाई

अभिषेक कहते हैं मुझे आज भी अच्छे से याद है कि पांच साल पहले इस बच्चे ने 10वीं से आगे पढ़ने के लिए भी नहीं सोचा था। करन की आर्थिक, घरेलू स्थिति कितनी बदतर है, यह हममें से कई साथियों को अच्छे से पता है। कड़ी मेहनत के साथ जज्बा, त्याग और समर्पण रंग लाया। अब वह बीटेक इन इलेक्ट्रानिक कम्युनिकेशन से पढ़ाई करेगा। उसकी फीस अभिषेक ने चंदे से जुटाई है।

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