रोचक होगी 10 मिनट की रागमाला से शास्त्रीय संगीत की पढ़ाई, प्रयागराज में संगीतबद्ध कर बना दिया रोचक

डाक्टर नम्रता बताती हैैं कि उन्होंने सरलतम ढंग से 10 थाट पर आधारित आश्रय राग माला को संगीत में पिरोया। प्रारंभिक शिक्षा में जिन रागों को सिखाए जाने का प्रविधान है। इस रागमाला में उन्हीं रागों का समावेश है। राग जब बदल जाते हैं तो उसकी पकड़ गाई जाती है।

Ankur TripathiThu, 22 Jul 2021 07:00 AM (IST)
जगत तारन पीजी कालेज के संगीत विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर का कमाल

प्रयागराज, गुरुदीप त्रिपाठी अक्सर शास्त्रीय संगीत को उबाऊ मानकर साधना से संगीत के विद्यार्थी कतराते हैं। दक्षता के लिए कठिन साधना करनी पड़ती है। यह बोझिल नहीं लगे इस दिशा में पहल की है इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के संघटक जगत तारन गर्ल्स पीजी कालेज में संगीत विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डाक्टर नम्रता देब और उनकी टीम ने। उन्होंने थाटमाला यानी 10 थाटों पर आधारित रागों की रागमाला को संगीतबद्ध कर इसे रोचक बनाया है।

शास्त्रीय और आध्यात्मिक पक्ष के बारे में जानकारी देने का प्रयास

डाक्टर नम्रता बताती हैैं कि उन्होंने सरलतम ढंग से 10 थाट पर आधारित आश्रय राग माला को संगीत में पिरोया। प्रारंभिक शिक्षा में जिन रागों को सिखाए जाने का प्रविधान है। इस रागमाला में उन्हीं रागों का समावेश है। राग जब बदल जाते हैं तो उसकी पकड़ गाई जाती है। इससे एक राग से दूसरे राग पर आने में सरलता होगी। यह रचना प्रचलित तीन ताल में निबद्ध है। 10 थाट पर आधारित आश्रय रागमाला के माध्यम से न केवल शास्त्रीय संगीत के सौंदर्य को दिखाने की चेष्टा की गई है वरन शास्त्र पक्ष का संक्षिप्त परिचय देते हुए आध्यात्मिक पक्ष को भी बताया गया है। रागमाला में कल्याण, बिलावल, भैरव, खमाज, काफी, मारवा, आसावरी, पूर्वी, तोड़ी तथा भैरवी थाट का परिचय मिलेगा। उत्तर भारतीय संगीत पद्धति की राग वर्गीकरण पद्धतियों में सबसे प्रचलित थाट पद्धति के जनक पंडित विष्णु नारायण भातखंडे द्वारा उल्लिखित 10 मुख्य थाटों से जनित रागों का गायन खुद डा. नम्रता और उनके विद्यार्थियों ने किया है। खुद ही लिखकर संगीतबद्ध किया है।

यू-ट्यूब पर होगा रिलीज

रागमाला के वाद्यों में तबला, पखावज, शंख, सितार, बांसुरी और सारंगी आदि का प्रयोग है। सरगम वैश्य, अभिषेक प्रजापति, अनुभव मिश्र, रोहित नौडियाल, सरगम पॉल, श्रुति त्रिपाठी, पूजा पांडेय, दीपक कुमार, अजय बनर्जी, पार्थ शंकर, शिराज खान और विमर्ष मालवीय ने भी इसमें योगदान दिया है। जल्द ही ध्वनि रिकॉॄडग और वीडियो के बाद रचना नव स्वरांकुर के यू-ट्यूब चैनल पर रिलीज कर दी जाएगी।

'डाक्टर नम्रता ने आश्रय राग माला को मधुर ढंग से प्रस्तुत किया है। उनका यह प्रयास सराहनीय है। वह और उनकी टीम बधाई के पात्र हैं। यह संगीत के विद्यार्थियों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।

प्रोफेसर पंडित साहित्य कुमार नाहर, कुलपति, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विवि, ग्वालियर

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