SRN: भर्ती करने की बजाय स्ट्रेचर पर इलाज शुरू कर रोकते हैं तत्काल सेवा की एंबुलेंस

एंबुलेंस कर्मियों को शिकायतें सबसे ज्यादा स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय से है जहां मरीज को ले जाने पर स्ट्रेचर या बेड नहीं होने का बहाना बनाकर घंटों रोके रखा जाता है। एंबुलेंस की ही व्हील स्ट्रेचर पर मरीज का इलाज शुरू कर एंबुलेंस रोके रखी जाती है

Ankur TripathiWed, 27 Oct 2021 09:00 AM (IST)
एसआरएन में सबसे ज्यादा समस्या, शिकायतों से भरे पड़े हैं एंबुलेंस कर्मियों के वाट्सएप ग्रुप

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। सरकारी एंबुलेंस 102 और 108 की जिले में जरूरत और लाखों आबादी के बीच इनकी व्यस्तता कोई लुकी-छिपी बात नहीं। लेकिन, एंबुलेंस और उनके कर्मचारियों को सरकारी अस्पताल ही मनमाने तरीके से इस्तेमाल कर व्यवस्था का माखौल उड़ा रहे हैं। एंबुलेंस कर्मियों को शिकायतें सबसे ज्यादा स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय से है जहां मरीज को ले जाने पर स्ट्रेचर या बेड नहीं होने का बहाना बनाकर घंटों रोके रखा जाता है। एंबुलेंस की ही व्हील स्ट्रेचर पर मरीज का इलाज शुरू करके दूसरे जरूरतमंद के लिए रवानगी बाधित की जाती है।

मरीज लेकर पहुंचे एंबुलेंस को रोके रखते हैं एसआरएन में

जानकारी के लिए बता दें कि 102 एंबुलेंस सेवा केवल गर्भवती महिलाओं के लिए और 108 की सेवा अन्य गंभीर मरीजों या घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए होती है। शहरी क्षेत्र में 10 एंबुलेंस 102 नंबर की और नौ एंबुलेंस 108 नंबर की संचालित हैं। पूरे जनपद में कुल 93 एंबुलेंस संचालित हैं। नियमत: मरीज अपनी सुपुर्दगी में लेने के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा एंबुलेंस को दूसरे मरीजों के लिए छोड़ देना चाहिए लेकिन स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में ऐसा नहीं हो रहा है। एंबुलेंस कर्मियों की शिकायतें हैं कि एसआरएन में मरीज ले जाने के बाद उन्हें घंटों फंसाए रखा जाता है। वहां बेड या स्ट्रेचर खाली न होने का बहाना बनाकर एंबुलेंस की ही स्ट्रेचर पर लिटाकर मरीज का उपचार किया जाता है। इसमें तीन से चार घंटे और कभी-कभी इससे अधिक समय भी लग जाता है। ऐसे में दूसरे जरूरतमंद मरीज के लिए लखनऊ से काल आने पर वे समय पर नहीं पहुंच पाते। ऐसी शिकायतों और तस्वीरों से एंबुलेंस कर्मियों का वाट्सएप ग्रुप भरा पड़ा है।

तकरीबन डेढ़ साल से बनी है यह समस्या

एंबुुलेंस सेवा के कार्यक्रम अधिकारी सुनील कुमार ने कहाकि इस समस्या के बारे में सीएमओ और जिलाधिकारी को भी कई बार अवगत करा चुके हैं। लेकिन करीब डेढ़ साल से यह समस्या बनी हुई है। कहा कि वैसे तो मरीज जिला अस्पतालों व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी ले जाए जाते हैं लेकिन गंभीर हालत वाले मरीज या घायलों को तुरंत स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय ही भेजना होता है और एंबुलेंस की स्ट्रेचर को घंटों फंसाए रखने की समस्या एसआरएन अस्पताल में ही ज्यादा है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.
You have used all of your free pageviews.
Please subscribe to access more content.
Dismiss
Please register to access this content.
To continue viewing the content you love, please sign in or create a new account
Dismiss
You must subscribe to access this content.
To continue viewing the content you love, please choose one of our subscriptions today.