प्रयाग संगीत समिति में दीक्षा समारोह : संगीत साधना में लीन 46 मेधावी कलाकारों को मिला स्वर्ण और रजत सम्मान

अव्वल साधकों को जब स्वर्ण और रजत सम्मान से नवाजा गया तो उनके चेहरे खिल उठे।

1996 से शास्त्रीय संगीत की धारा को बढ़ाने वाली संस्था प्रयाग संगीत समिति में गुरुवार को दीक्षा समारोह का शुभारंभ किया गया। संगीत साधना में लीन अव्वल साधकों को जब स्वर्ण और रजत सम्मान से नवाजा गया तो उनके चेहरे खिल उठे।

Ankur TripathiThu, 04 Mar 2021 10:00 PM (IST)

प्रयागराज, जेएनएन। 1996 से शास्त्रीय संगीत की धारा को बढ़ाने वाली संस्था प्रयाग संगीत समिति में गुरुवार को दीक्षा समारोह का शुभारंभ किया गया। संगीत साधना में लीन अव्वल साधकों को जब स्वर्ण और रजत सम्मान से नवाजा गया तो उनके चेहरे खिल उठे। सत्र 2017-18 में गायन, वादन और नृत्य के कुल 1,64,248 विद्यार्थियों ने संगीत की परीक्षा दी। इसमें 72.71 फीसद उत्तीर्ण रहे और 46 पक्के साधकों ने मेरिट में अपनी जगह सुनिश्चित की। 

गुरुवार शाम छह बजे दो दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत 

मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। सचिव अरुण कुमार ने अतिथि का स्वागत किया। महेश दयाल के निर्देशन में प्रार्थना, सरस्वती वंदना और स्वागत गीत हुआ। मंच पर सोनाली, मुक्ति, जाह्नवी, अनिल आदि ने प्रांगण में सुरों के रंग बिखेरे। अंत में पदक धारकों को  प्रमाण-पत्र और पदक वितरित किया गया। कुछ कलाकारों के एकल प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। 

प्रयाग संगीत समिति की सहायक निदेशक उमा दीक्षित ने बताया कि अमेरिकी मेधावी जुदीथ जोसफ निजी कारण से पदक प्राप्त करने के लिए नहीं आ पाए हैैं। वह बाद में इसे प्राप्त करेंगे। शेष मेधावियों को शुक्रवार शाम को पदक प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मधुरानी शुक्ला और सुनील गुप्ता ने किया। 

मेडलधारियों के बोल     

घर में दिन-रात बहती है सुरों की धारा 

- गायन विधा में स्वर्ण पदक विजेता जलज श्रीवास्तव सिविल लाइंस निवासी हैैं। पिता पंकज श्रीवास्तव और अनुराधा श्रीवास्तव भी संगीत में सक्रिय हैैं। दिन-रात सुरों की धारा बहती रहती है। वह संगीत नाटक अकादमी, त्रिवेणी महोत्सव सहित कई प्रतियोगिताओं में सम्मान प्राप्त कर चुके हैैं। जलज ने कहा कि गुरु पं प्रेम कुमार मल्लिक और माता को यह उपलब्धि समर्पित करता हूं।   

चार पीढिय़ों से चल रही संगीत की यात्रा

बांसुरी वादन विधा में स्वर्ण पदक विजेता मनीष निषाद बनारस के अस्सी घाट के रहने वाले हैैं। उनके खानदान में चार पीढिय़ों से संगीत की यात्रा चल रही है। उनके बड़े पिता कैलाश निषाद अंतरराष्ट्रीय तबला वादक हैैं। दादा स्व. हेमराज निषाद सितार वादक थे। परदादा स्व. नवरंग निषाद मशहूर सारंगी वादक रहे। 12 साल से संगीत की साधना में लीन मनीष गुरु रूपक कुलकर्णी से संगीत की शिक्षा ले रहे हैैं। कहा कि इस विधा में करियर बनाना है। 

 दोहरे स्वर्ण पदक से मिला नया आत्मबल  

तबला वादन विधा में दोहरे स्वर्ण की विजेता गरिमा नैनी में रहती हैैं। पांच से शुरू हुई संगीत यात्रा विवाह के बाद भी जारी है। पति शरद सिविल लाइंस स्थित निजी कंपनी में लिफ्ट इंजीनियर हैैं। वह अखिल भारतीय संगीत प्रतियोगिता सहित अन्य प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैैं। कहती हैैं कि सतत प्रयास रहेगा कि विश्व पटल पर इस विधा में देश का नाम ऊंचा करें। 

सात साल की उम्र से ही थिरकने लगे पांव

- कथक में रजत पदक विजेता हिमानी रावत इलाहाबाद संग्रहालय की निवासी हैैं। सात साल की उम्र से नृत्य विधा में साधनारत हैैं। अखिल भारतीय संगीत प्रतियोगिता, त्रिवेणी महोत्सव, संगीत नाटक अकादमी सहित कई प्रतियोगिताओं में सम्मान प्राप्त कर चुकी हैैं। पिता संतन सिंह और माता सुषमा रावत ने उपलब्धि पर खुशी व्यक्त की है। 

स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले मेधावी 

- जलज श्रीवास्तव (गायन), मनीष निषाद (तंत्रवाद), गरिमा(तबला), अनामिका घोष (कथक नृत्या), प्रिया चक्रवर्ती ( जनरल गीत), रिद्धी देवनाथ( रवींद्र संगीत नृत्य), समुन माल(भरतनाट्यम), दीप्ती कुकरेत(ओडिसी), शुभ्रांगसु मोहन देव (तबला विशेष), सुधांषु(गायन), श्वेता शुक्ला (तबला), नारायण कटे (तंत्र वाद्य विशेष), प्रथा भौमिक(रवींद्र संगीत तथा वाद्य), प्रिया चक्रवर्ती (भारतनाट्यम), प्रियंकिता बोस( कथक), आयुषी(तंत्रवाद्य), पूर्णिमा(रवींद्र संगीत तंत्रवाद्य)।

रजत पदक प्राप्त करने वाले मेधावी 

रिया चक्रवर्ती और श्रेष्ठ द्विवेदी(भारतनाट्यम), गीतांजली और हिमानी रावत(कथक), निष्ठा और हरिभूषन झा(तबला), पायर सरकार और वेदप्रकाश( गायन), अभिषेकदास और श्रीपर्ना ( भरतनाट्यम), अदिति और आरुषि (कथक), जुदीथ जोसफ, परिमिति (कथक), अमृता चटर्जी और स्मृति कोना (नजरूल गीति), वसुंधरा और अर्चिता।

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