इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भी पुराना है प्रयागराज शहर का राजकीय इंटर मीडिएट कालेज, जानिए आज कहां हैं यहां से पढ़कर निकले छात्र

राजकीय इंटर मीडिएट कालेज प्रयागराज से पढ़ कर निकले छात्र देश के विभिन्न क्षेत्रों में छाए रहे हैं।

सीबीएसई के चेयरमैन रहे विनीत जोशी 1985 में यहां से पढ़कर निकले हैं। यूपी बोर्ड की मेरिट में स्थान बनाने के साथ आइआइटी कानपुर से बीटेक करने के बाद पहले प्रयास में आइएएस की परीक्षा पास कर ली थी। वर्तमान वे सीबीएसई की नेशनल टैलेंट सर्च एक्जामिनेशन के महानिदेशक हैं।

Publish Date:Tue, 24 Nov 2020 03:42 PM (IST) Author: Rajneesh Mishra

प्रयागराज, जेएनएन। शहर का राजकीय इंटर मीडिएट कालेज देश के पुरातन शैक्षणिक संस्थानों में है। अंग्रेजों ने सन 1839 में इसकी स्थापना की थी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय 1887 में स्थापित हुआ था। राजकीय इंटर मीडिएट कालेज से पढ़ कर निकले छात्र देश के विभिन्न क्षेत्रों में छाए रहे हैं। मदन मोहन मालवीय एवं हेमवती नंदन बहुगुणा भी यहीं पढ़े थे।  

न्यायपालिका से लेकर प्रशासनिक पदों पर भी यहां से अध्ययनरत छात्रों ने अपना डंका बजाया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे न्यायमूर्ति वीएन खरे इस कालेज के छात्र रहे हैं। यूपी बोर्ड की मेरिट में भी इस कालेज के छात्रों का दबदबा आज भी कायम है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविद के सचिव कपिल देव त्रिपाठी ने भी यहीं से पढ़ाई की है। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटर परीक्षा में वे अव्वल रहे थे। भारतीय प्रशासनिक सेवा में उन्होंने बेहतर स्थान बनाया था।

सीबीएसई के चेयरमैन रहे विनीत जोशी भी 1985 में यहां से पढ़कर निकले हैं। यूपी बोर्ड की मेरिट में स्थान बनाने के साथ आइआइटी कानपुर से बीटेक करने के बाद पहले ही प्रयास में आइएएस की परीक्षा पास कर ली थी। वर्तमान वे सीबीएसई की नेशनल टैलेंट सर्च एक्जामिनेशन के महानिदेशक हैं।  आज भी इस कालेज में प्रवेश छात्रों की पहली पसंद है। कालेज में इस समय भी पांच हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।


शुरूआत में चौक की चुंगीवाली कोठी में चला स्कूल
 कालेज के प्राक्टर रहे शिक्षक एसडी मिश्र बताते हैं कि यह देश की सबसे पुरानी संस्था है। 1839 में हाईस्कूल तक की शिक्षा के लिए इसकी स्थापना की गई थी। इसे सरकारी एंग्लो-वर्नाक्यूलर स्कूल के नाम से खोला गया था। बाद में इसे 1846 में अमेरिकन मिशन को दे दिया गया था। उस समय मिशन वालों ने काफी तेजी दिखाई और दो वर्ष के भीतर सात बाजार-स्कूल और एक कन्या पाठशाला खोली। शुरूआत में यह कालेज चौक की चुंगीवाली कोठी में रहा। फिर वहां से उठकर मलाका के पास वर्तमान स्थान में चला गया। समय के साथ इसके स्वरूप में परिवर्तन होता रहा।


मदन मोहन मालवीय एवं हेमवती नंदन बहुगुणा भी रहे थे छात्र
कालेज के प्रधानाचार्य डीके सिंह कहते हैं कि यह बहुत गौरवशाली संस्था है। मदन मोहन मालवीय ने यहीं से पढ़ाई की है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना उन्होंने की है। हेमवती नंदन बहुगुणा ने भी यहीं से शिक्षा ग्रहण की है। वे प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहे थे। अनुग्रह सिंह,धर्मेंद्र यादव, प्रवीण पटेल, प्रशांत सिंह आदि भी यहीं से पढ़े हुए हैं। इसरो के वैज्ञानिक श्याम कृष्ण पांडेय भी यहां के छात्र रहे हैं। कारगिल युद्ध में शामिल रहे कर्नल सुधीर पराशर भी इसी स्कूल के प्रोडक्ट हैं। वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, पत्रकार, बिजनेस मैन, विभिन्न मल्टी नेशनल कंपनियों के उच्च पदों तक यहां के छात्र पहुंचे हैं।


हर क्षेत्र में छाए रहे यहां के छात्र
राजकीय इंटर कालेज के हिन्दी के शिक्षक डा.प्रभाकर त्रिपाठी बताते हैं आज भी यहां से पढ़कर निकले छात्र देश एवं विभिन्न प्रदेशों के सर्वोच्च पदों पर हैं।

न्यायपालिका के क्षेत्र में इनका रहा है नाम

इलाहाबाद हाईकोर्ट में यहां से पढ़े छात्र वीएन खरे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने। न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल, न्यायमूर्ति डीपी सिंह, न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता,न्यायमूर्ति विनीत सरन, न्यायमूर्ति अश्वनी मिश्र, न्यायमूर्ति नीरज तिवारी आदि ने भी इसी कालेज से शिक्षा ग्रहण की है।

प्रशासनिक पदों पर पहुंचने वालों की भी लंबी श्रंखला रही है

इनमें केडी त्रिपाठी, प्रदीप शुक्ला, विवेक जोशी, विनीत जोशी, राजेश पांडेय, अनंतदेव त्रिपाठी, शिवकुमार राय, वीरेंद्र ओझा, धर्मेंद्र ओझा, राहुल द्विवेदी, जितेंद्र शुक्ला, आनंद मिश्र, अभिजीत सिंह, मनीष मिश्र, अमरेंद्र प्रताप सिंह आदि शामिल हैं।

ऐसे ही चिकित्सकों की भी लंबी फेहरिस्त है

इनमें मोतीलाल नेहरू मेडिकल के प्राचार्य डॉ.एसपी सिंह, डॉ.यूबी यादव, डॉ.केडी त्रिपाठी, डॉ.आलोक मिश्र, डॉ.युगांतर पांडेय, डॉ.सुबोध जैन, डॉ.प्रकाश खेतान, डॉ.ओपी उपाध्याय, डॉ.कुलदीप गुप्ता, डॉ.मोहित जैन, डॉ.कमल सिंह, डॉ.सत्येंद्र सिंह, डॉ. नीरज अग्रवाल, डॉ.पंकज त्रिपाठी, डॉ. राजकुमार मिश्र, डॉ. अजीत भार्गव, डॉ. आंजनेय शुक्‍ला, डॉ. पंकज श्रीवास्‍तव आदि शामिल हैं।

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