Fodder SCAM: गायों का भूसा भी डकार रहे सरकारी कर्मचारी, सरिया फर्म के नाम पर फर्जी भुगतान

नियमानुसार ग्राम सचिव और प्रधान भूसा की खरीदारी स्थानीय किसानों से कर उन्हें भी भुगतान कर सकते हैं। इसी का फायदा उठाकर कर विकास खंड नेवादा में बनी गोशालाओं के भूसा खरीद में जमकर धांधली की जा रही है।

Ankur TripathiThu, 16 Sep 2021 10:23 AM (IST)
नेवादा ब्लाक के कई गोशालाओं का मामला, आडिट करने वाली संस्थाएं भी घेरे मे

कौशांबी, जागरण संवाददाता। सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग रहा है। मनरेगा, आवास निर्माण, केंद्रीय वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग आदि के धन में कमीशन का भारी खेल चल रहा है। कर्मचारियों ने फर्जी बिल बाउचर लगाकर लाखों का भुगतान किया है। आडिट करने वाली संस्थाएं भी सवालों के घेरे में हैं। ईमानदारी से आडिट किया जाता तो सचिवों व अन्य कर्मचारियों की फर्मों को भुगतान करने से रोका जा सकता था। ऐसा ही एक मामला नेवादा ब्लाक में पशु पालन विभाग का आया है। एक सरिया व सीमेंट आपूर्तिकर्ता फर्म को गोशाला में भूसा आपूर्ति का लाखों रुपये भुगतान कर दिया गया है।

कमीशन के लिए मैटेरियल भुगतान प्रणाली में बना है रैकेट

बेसहारा मवेशियों के संरक्षण के लिए करीब पांच दर्जन गोशालाओं का निर्माण कराया गया है। इनमें रखे गए मवेशियों के भरण पोषण को भूसा, चोकर, चूनी आदि की आपूर्ति के लिए पशुपालन विभाग ने शिव इंटरप्राइजेज को टेंडर दिया है। नियमानुसार ग्राम सचिव और प्रधान भूसा की खरीदारी स्थानीय किसानों से कर उन्हें भी भुगतान कर सकते हैं। इसी का फायदा उठाकर कर विकास खंड नेवादा में बनी गोशालाओं के भूसा खरीद में जमकर धांधली की जा रही है। आरोप है कि सरिया सीमेंट बिक्री करने वाली वाजपेयी ट्रेडर्स फर्म को भूसा की सप्लाई के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया है। ग्राम पंचायत बरियावां समेत हासिमपुर किनार और जैतपुर पूरे हजारी गोशालाओं का 69900-69900 रुपये भूसा खरीद का भुगतान किया गया है। आरोप यह भी है कि ब्लाक में तैनात जिम्मेदार अपने परिवारीजनों के नाम कागजी फर्म बनाकर मैटेरियल का भुगतान ले रहे हैैं। यह सारा खेल रैकेट बनाकर मोटे कमीशन के लिए किया जा रहा है। इसमें ग्राम सचिव, तकनीकी सहायक, लेखाधिकारी, कंप्यूटर आपरेटर समेत प्रधान भी शामिल हैं।

सत्यापन में अनदेखी से मालामाल हो रही हैं फर्म

विकास खंड स्तर पर आपूर्तिकर्ता फर्मों का स्थलीय सत्यापन वाणिज्य कर विभाग और भुगतान करने वाली संस्था के सक्षम अधिकारी के सत्यापन के बाद जनपद की वेबसाइट पर फीडिंग के लिए भेजा जाता है। हकीकत यह है कि वाणिज्य कर विभाग और भुगतान करने वाली संस्थाओं के स्थलीय निरीक्षण और सत्यापन न करने से कागजों पर चल रही फर्मों का पंजीयन कर दिया जाता है। आडिट के दौरान भी इन फर्मों के बिल बाउचर का मिलान नहीं किया जाता है। जिम्मेदारों की इस बड़ी लापरवाही से ब्लाक स्तर पर कागजी फर्मों की बाढ़ सी आ गई है, जो मनरेगा और केंद्रीय वित्त से मैटेरियल भुगतान लेकर उच्चाधिकारियों के आखों में धूल झोंक रहें हैं।

सीडीओ ने यह कहा

किसी कागजी फार्म को यदि भूसा खरीद का भुगतान किया गया है तो यह गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर कार्रवाई होगी। यदि किसी सचिव व ब्लाक के कर्मी के करीब होने की जानकारी मिली तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

- शशिकांत त्रिपाठी, मुख्य विकास अधिकारी

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