Allahabad Museum: मुख्य न्यायाधीश के आदेश के बाद भी नहीं खुला संग्रहालय का गेट

संग्रहालय के वित्त एवं लेखाधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि अप्रैल 2020 में हाईकोर्ट से हुए आदेश के बाद गेट निर्माण के लिए उद्यान विभाग और फिर पीडीए से अनुमति मांगी थी। उद्यान अधिकारी ने कहा था कि इसके लिए मंडलायुक्त के अधीन समिति है अनुमति वहीं से मिलेगी

Ankur TripathiWed, 08 Dec 2021 01:27 PM (IST)
प्रशासनिक प्रक्रिया में लेटलतीफी, संग्रहालय प्रशासन भी अनुमति बिना लाचार

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। इलाहाबाद राष्ट्रीय संग्रहालय का मुख्य गेट पुन: बनाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गोविंद माथुर (अब सेवानिवृत्त) का आदेश भी काम नहीं आया। सेवानिवृत्ति से पहले उनके नेतृत्व वाली खंडपीठ ने 2014 की एक जनहित याचिका पर हो चुके आदेश को स्वत: संज्ञान लेते हुए आदेश दिया था कि संग्रहालय का पुराना गेट फिर से स्थापित किया जाए, भारी और जरूरी सामग्रियों को संग्रहालय तक गाड़ियां ले जाने की अनुमति और शोध छात्रों, दर्शकों व अन्य पर्यटकों के लिए वाहन पार्किंग का भी आदेश था। लेकिन, महीनों से यह आदेश प्रशासनिक फाइलों में ही घूम रहा है।

अप्रैल 2020 में हाईकोर्ट से हुआ था आदेश, अमल अब तक नहीं

संग्रहालय में जाने के लिए रास्ता अभी अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क के गेट से ही है। जबकि करीब आठ साल पहले इसका अपना मुख्य गेट हुआ करता था। पार्क में प्रदूषण फैलने को लेकर 2014 में मधु सिंह की दाखिल एक जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की तत्कालीन खंडपीठ ने पार्क में गाड़ियों का प्रवेश बंद कराने का आदेश दिया था। उसी आदेश के क्रम में संग्रहालय का गेट भी खत्म कर बाउंड्री बना दी गई थी। बीते 19 दिसंबर 2020 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और उनके साथ तीन अन्य वरिष्ठ न्यायमूर्तिगण इलाहाबाद राष्ट्रीय संग्रहालय गए थे। इसे राष्ट्र की बेहद महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर वाली संस्था और शोध छात्रों के लिए भी जरूरी बताया था। यह मंशा जताई थी कि इस संग्रहालय का व्यापक प्रचार प्रसार होना चाहिए, इस संस्था से शोध कार्यों को बढ़ावा मिले। इसके लिए न्यायमूर्ति गोविंद माथुर ने 2014 को ही जनहित याचिका को स्वत: संज्ञान लेकर सात अप्रैल 2021 को आदेश पारित किया था। इस आदेश पर क्रियान्वयन अब तक नहीं हो सका और व्यवस्था जस की तस है।

संग्रहालय के वित्त एवं लेखाधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि अप्रैल 2020 में हाईकोर्ट से हुए आदेश के बाद गेट निर्माण के लिए उद्यान विभाग और फिर पीडीए से अनुमति मांगी थी। उद्यान अधिकारी ने कहा था कि इसके लिए मंडलायुक्त के अधीन समिति है अनुमति वहीं से मिलेगी। मंडलायुक्त के पास पत्राचार करने पर उन्होंने जिलाधिकारी को उचित कदम उठाने का आदेश दिया था। जिलाधिकारी कार्यालय की तरफ से भी इस पत्र पर क्रियान्वयन शुरू हुआ तब तक इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक अन्य जनहित याचिका पर हुए आदेश के बाद अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क में कई पक्के निर्माण को ढहाने की कार्रवाई होने लगी। इसी में संग्रहालय गेट निर्माण और वाहन पार्किंग का मामला लंबित हो गया है।

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