धरती की सेहत सुधारने में जुटा गंगा समग्र, किसानों को जैविक खेती के लिए किया जा रहा प्रेरित

गंगा समग्र के प्रांतीय सह संयोजक चंद्रशेखर मिश्र बताते हैैं कि फिलहाल कुल सात सौ किसान योजना का हिस्सा हैं इनमें भी प्रयागराज के 200 किसान शामिल हैं। मृदा सुपोषण के बाद फसल तैयार करने के लिए बीज डालने व पौधों के रोपण की प्रक्रिया शुरू होगी।

Rajneesh MishraTue, 15 Jun 2021 07:10 AM (IST)
श्रृंगवेरपुर में किसानों को मिट्टी की जानकारी देते गंगा समग्र के पदाधिकारी व कृषि विज्ञानी।

प्रयागराज,[अमलेंदु त्रिपाठी]। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के आनुषांगिक संगठन गंगा समग्र धरती की सेहत सुधारने में जुटा है। पहले चरण में काशी प्रांत के जिलों में गंगा तीरे पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों को योजना में शामिल किया गया है। किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है, साथ ही चिह्नित किसानों के खेतों की मिट्टी को सुपोषित करने की कवायद शुरू कर दी गई है। अगस्त तक कार्य चलेगा। खेतों में गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन के मिश्रण का छिड़काव कर कार्बन व मित्र कीट की संख्या बढ़ाई जा रही है।

सात सौ किसान बनेंगे योजना का हिस्‍सा

गंगा समग्र के प्रांतीय सह संयोजक चंद्रशेखर मिश्र बताते हैैं कि फिलहाल कुल सात सौ किसान योजना का हिस्सा हैं, इनमें भी प्रयागराज के 200 किसान शामिल हैं। श्रृंगवेरपुर, हंडिया के आसेपुर, कौशांबी में टेवा व मेदनीपुर में मृदा सुपोषण के बाद फसल तैयार करने के लिए बीज डालने व पौधों के रोपण की प्रक्रिया शुरू होगी। अन्य किसानों को भी मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा

मृदा की सेहत सुधारने के बाद उसमें औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। खासकर अश्वगंधा, सतावर, कालमेघ, खस, लेमनग्रास की खेती होगी। मोटे अनाज की खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा। विशेष रूप से मक्का, अरहर, सरसों, सांवा, कोदो, ज्वार, बाजरा का उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य है। यदि किसान चाहेंगे तो वह पारंपरिक फसल धान, गेहूं ले सकते हैं। सब्जियों की पैदावार लेने में भी मदद की जाएगी।

प्राकृतिक कीटनाशक का प्रयोग

जैविक खेती से किसानों को जोडऩे में सहयोग करने वाले कृषि विज्ञानी डॉ. हिमांशु द्विवेदी कहते हैैं कि यदि फसल में किसी भी तरह के कीट लगते हैं तो उसका उपचार भी प्राकृतिक होगा। फसल पर सप्तपर्णी अर्क का छिड़काव किया जाएगा जिसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। यह अर्क कनेर, नीम, धतूर, बेहया के पत्ते, मदार, बेल व शरीफा के पत्ते से तैयार किया जाएगा।

फसल पर अमृत पानी का छिड़काव

उत्पादन को बढ़ाने के लिए फसल पर अमृत पानी का छिड़काव भी किया जाएगा। यह गोमूत्र, गोबर, बरगद की छाया की मिट्टी, तालाब की मिट्टी को मिलाकर तैयार होगा। आवश्यकता के अनुसार शाक सब्जियों के अपशिष्ट का भी प्रयोग किया जा सकता है। इसके प्रयोग से किसी भी तरह के कीट या बीमारी की समस्या का समाधान हो जाएगा।

किसान को भायी यह पहल

किसानों को यह पहल लुभा रही है। नवाबगंज में उलदा निवासी किसान अरविंद सरोज कहते हैैं कि अभी मृदा परीक्षण कराया है। मिट्टी से नुकसानदेय रासायनिक तत्वों को खत्म कर जैविक विधि से खेती की शुरुआत करेंगे। फिलहाल धान की तैयारी चल रही है। जगापुर आनापुर के सुशील मिश्र ने कहा कि धरती की सेहत सुधारने के लिए जैविक खेती जरूरी है। रासायनिक खादों ने बहुत नुकसान पहुंचाया है। मित्र कीट नष्ट होने से फसल का उत्पादन कम हुआ है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.