रीयल लाइफ के हीरो थे इंस्पेक्टर राधेश्याम त्रिवेदी, प्रयागराज में अपराधियों और उपद्रवियों में था खौफ

शनिवार रात खबर मिली कि यूपी पुलिस के पूर्व जाबांज इंस्पेक्टर राधेश्याम त्रिवेदी नहीं रहे तो लोगों को सदमा लगा

अपराधी तो उनके नाम से ही कांपते थे। तब कहींं बलवा हो रहा हो तो बस एक नाम काफी था कि इंस्पेक्टर त्रिवेदी वहां आ गए हैं। फिर.. भागो...भागो त्रिवेदी आ गया... का शोर मचता और बवाल कर रही भीड़ गलियों में भागती दिखती थी

Ankur TripathiSun, 16 May 2021 01:45 AM (IST)

प्रयागराज, अंकुर त्रिपाठी। हाल ही में ईद के दिन ओटीटी पर रिलीज फिल्म राधे में अंडरकवर इंस्पेक्टर बने अभिनेता सलमान खान का अपराधियों में खौफ देख लोग खुश हो रहे हैं। फिल्मी इंस्पेक्टर राधे द्वारा क्रिमिनल के एनकाउंटर पर सीटी बजा रहे प्रयागराज के तमाम लोगों को शनिवार रात जब यह खबर मिली कि यूपी पुलिस के जाबांज पूर्व इंस्पेक्टर राधेश्याम त्रिवेदी नहीं रहे तो उन्हें सदमा सा लगा। वजह यह कि रील फिल्म के राधे से कहीं ज्यादा खौफ था रीयल लाइफ के इंस्पेक्टर राधेश्याम त्रिवेदी का। अपराधी तो उनके नाम से ही कांपते थे। तब कहींं बलवा हो रहा हो तो बस एक नाम काफी था कि इंस्पेक्टर त्रिवेदी वहां आ गए हैं। फिर... भागो...भागो त्रिवेदी आ गया... का शोर मचता और बवाल कर रही भीड़ गलियों में भागती दिखती थी। त्रिवेदी के इस जलजले में उनको भरपूर समर्थन देने वाले रिटायर्ड आइजी लालजी शुक्ला (तत्कालीन एसपी सिटी) ने निधन की खबर मिलने पर दुख जताया और उनकी आत्मा की शांति की कामना की। इंस्पेक्टर त्रिवेदी की टीम में शामिल रहे इंस्पेक्टर वेदप्रकाश राय,  कुलदीप तिवारी, सब इंस्पेक्टर जीतेंद्र पाल सिंह का भी जलवा रहा जो अब भी बरकरार है। वे भी त्रिवेदी जी के निधन से शोकाकुल हैं और कहते हैं कि सर का काम लाजवाब था, वे दिलेर और निर्भीक थे। 

खुलेआम गुंडागर्दी करने वाले अपराधी और सफेदपोश थे निशाने पर

प्रयागराज पुलिस में ये दौर था 1995 से 2003 तक का। उस वक्त अंडरवर्ल्ड माफिया से लेकर स्थानीय हार्डकोर क्रिमिनल प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) समेत आसपास के जिलों में पुलिस के लिए सिरदर्द बने थे। तभी संगमनगरी में आए इंस्पेक्टर राधेश्याम त्रिवेदी। उन्होंने अपनी टीम तैयार की और फिर अपराध जगत में अपना रौबदाब बनाकर खुलेआम गुंडई करने वाले अपराधियों और सफेदपोशों की शामत आ गई। खुलेआम लूट और हत्या करने वाले अपराधियों को उनकी ही भाषा में जवाब देने लगे थे त्रिवेदी। यानी खुलेआम एनकाउंटर में अपराधी ढेर। अब तक छप्पन फिल्म के साधु अगासे से ज्यादा एनकाउंटर कर त्रिवेदी ने अपराधियों में ऐसी खौफ पैदा कि वे डरकर एक के बाद एक शहर छोड़कर भागने लगे। त्रिवेदी उन्हें दूसरे जिलों से उठाकर लाते और यहां नैनी जेल भेजते। कस्टडी से भागने की कोशिश करने पर वे पुलिस के हाथों मारे जाते।

लॉकअप के सामने देखकर भी कांप जाते थे गुंडे

त्रिवेदी इस कदर अपराध जगत को साफ करने में जुटे थे कि उनके नाम भर से कातिलों में सिहरन होने लगी थी। 1998 से 2002 का ऐसा दौर था प्रयागराज में कि जेल से कोर्ट में पेशी पर आए अपराधी भी कचहरी लॉकअप के सामने इंस्पेक्टर त्रिवेदी को देख कांप जाते थे। उनके डर से जाने कितने अपराधी जमानत तुड़वाकर जेल चले गए थे। उन्हें त्रिवेदी ने साफ संदेश दिया था कि जेल में रहकर या बाहर आने पर ऐसी वैसी हरकत की तो कोई बचा नहीं पाएगा। जो नहीं सुधरे उन्हें आपराधिक कारनामा करने के बाद त्रिवेदी की टीम ने ढेर कर दिया। तब सक्रिय रहे तत्कालीन शहर पश्चिमी के विधायक अतीक अहमद हों या कोई और सफेदपोश नेता, सबको त्रिवेदी ने अपनी जाबांजी से मुश्किल भरा दौर दिखाया।

...आपको भूल न पाएंगे इंस्पेक्टर त्रिवेदी

2002 फरवरी में कचहरी में हुए कथित बम हमले के बाद अतीक अहमद को एसआरएन अस्पताल लाया गया तो उनके समर्थक भारी बवाल काटने लगे। तब तत्कालीन एसपी सिटी लालजी शुक्ला ने कहा त्रिवेदी को बुलाओ जबकि कई थानों की फोर्स मौजूद थी, और त्रिवेदी के आकर जीप से उतरते ही शोर मचा, ....भागो त्रिवेदी आया.. और बवाल काट रही भीड़ गलियों में भागने लगी। एक ही रात तीन-तीन हार्डकोर अपराधियों को ढेर करने  वाले त्रिवेदी के आज भी पुलिसवाले मुरीद हैं। रिटायर होने के बाद वह सीतापुर में रहने लगे थे जहां उनका निवास है। शनिवार को सीतापुर में दिल की बीमारी की वजह से त्रिवेदी जी के देहांत की खबर आई तो उनकी पुलिसिंग का लोहा मानने वाले सिपाही से लेकर अफसर और प्रयागराज में उन्हें जानने  वाले लोग दुखी हो गए। सबका यही कहना था...उनके जैसा अब कहां हैं....आपको भूल न पाएंगे इंस्पेक्टर त्रिवेदी।

 

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