लोगों को तेजी से दिव्यांग बना रहा फाइलेरिया, घातक बीमारी से बचने काे डाक्‍टर की मानें ये सलाह

डा. रवि पचौरी ने बताया कि विगत दो वर्षों से जनपद प्रयागराज में विशेष फाइलेरिया अभियान जिसे आइडीए अभियान के नाम से जाना जाता है चलाया जा रहा है। आइडीए अभियान में आइवरमेक्टिन सहित कुल तीन औषधियां एक साथ खाकर फाइलेरिया जैसे घातक रोग से मुक्ति पाई जा सकती है।

Brijesh SrivastavaSat, 04 Dec 2021 10:35 AM (IST)
फाइल‍ेरिया एक खतरनाक रोग है। इससे बचना है तो डाक्‍टरों की सलाह पर अमल करें।

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार फाइलेरिया जिसे हाथीपांव भी कहते हैं, दुनिया की दूसरे नंबर की ऐसी बीमारी है जो बड़े पैमाने पर लोगों को दिव्यांग बना रही है। इससे शारीरिक अंगों ही नहीं मानसिक तौर पर मरीज को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं इस घातक बीमारी के लक्षण, कारण और इससे बचने के उपाय। चिकित्‍सक इस संबंध में सलाह दे रहे हैं।

पांच वर्षों तक लगातार फाइलेरिया से बचाव को खाएं दवा : डा. रवि पचौरी

हिंद इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डा. रवि पचौरी का कहना है कि फाइलेरिया की वजह से किसी की मौत भले ही न हो, लेकिन इस बीमारी से व्यक्ति जीवन भर के लिए परेशान हो जाता है। फाइलेरिया के उन्मूलन के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान पांच सालों तक लगातार फाइलेरिया से बचाव की दवा खानी चाहिए, जिससे कि फाइलेरिया जैसी घातक बीमारी से बचा जा सके।

आइडीए अभियान चलाया जा रहा

डा. रवि पचौरी ने बताया कि विगत दो वर्षों से जनपद प्रयागराज में विशेष फाइलेरिया अभियान जिसे आइडीए अभियान के नाम से जाना जाता है, चलाया जा रहा है। आइडीए अभियान में आइवरमेक्टिन सहित कुल तीन औषधियां एक साथ खाकर फाइलेरिया जैसे घातक रोग से मुक्ति पाई जा सकती है।

इलाज नहीं केवल जागरूकता ही फाइलेरिया से है बचाव : जिला मलेरिया अधिकारी

जिला मलेरिया अधिकारी आनंद सिंह ने बताया कि जनपद में फाइलेरिया के अब तक कुल 1920 मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें से हाथीपांव के 944 रोगी चिह्नित किए गए हैं। इस बीमारी के लक्षण दिखने में संक्रमित होने के बाद 5 से 15 वर्ष भी लग जाते हैं। इस बीमारी का कोई उपचार नहीं है। इसलिए सबसे बेहतर है कि फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन किया जाए। यह दवा साल में एक बार खानी होती है, जिससे फाइलेरिया से बचा जा सकता है। भारत में लगभग 65 करोड़ लोगों में इस बीमारी का संभावित खतरा माना जा रहा है।

फाइलेरिया संबंधी अन्‍य जानकारी

जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि कई बार यह बीमारी इस कदर अपना असर दिखाती है कि व्यक्ति के लिए दैनिक क्रियाएं और रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है। पीड़ित व्यक्ति पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हो जाता है। हर साल तीन दिसंबर को विश्व दिव्यांग दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उदेश्य दिव्यांगों के प्रति लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना और उनको अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। इसी दिवस पर फाइलेरिया से दिव्यांग हुए लोगों की भी मांग है कि उन्हें भी अन्य श्रेणी के दिव्यांगों की तरह सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाए।

क्या है फाइलेरिया बीमारी

फाइलेरिया बीमारी क्यूलैक्स फैंटीगंस मादा मच्छर के जरिए फैलती है। जब यह मच्छर किसी फाइलेरिया से ग्रसित व्यक्ति को काटता है तो वह संक्रमित हो जाता है। फिर जब यह मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के विषाणु रक्त के जरिए उसके शरीर में प्रवेश कर उसे भी फाइलेरिया से ग्रसित कर देते हैं। ज्यादातर संक्रमण अज्ञात या मौन रहते हैं और लंबे समय बाद इनका पता चल पाता है। इस बीमारी का कारगर इलाज नहीं है। सही रोकथाम ही इसका समाधान है।

फाइलेरिया के लक्षण

फाइलेरिया संक्रमित मच्छरों के काटने के बाद व्यक्ति को बहुत सामान्य लक्षण दिखते हैं। जैसे कि अचानक बुखार आना (आमतौर पर बुखार 2-3 दिन में ठीक हो जाता है), हाथ-पैरों में खुजली होना, एलर्जी और त्वचा की समस्या, इस्नोफीलिया, हाथों में सूजन, पैरों में सूजन के कारण पैर का बहुत मोटा हो जाना, अंडकोष में सूजन आदि। फाइलेरिया का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है।

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