ठोस चाहत और मजबूत इरादे से किया इन्होंने कारोबार का किया विस्तार

उनके यहां संविदा पर करीब 200 से 250 स्टॉफ काम करते हैं।
Publish Date:Fri, 23 Oct 2020 12:30 AM (IST) Author: Brijesh Srivastava

प्रयागराज, जेएनएन। कहते हैं कि दृढ़ इच्छा शक्ति और मजबूत इरादे हों तो कोई भी मंजिल हासिल करना मुश्किल नहीं है। कोई काम ईमानदारी और लगन से किया जाए तो उसमें असफलता की तनिक भी गुंजाइश नहीं होती है। हार्डवेयर के प्रतिष्ठित कारोबारी राजेंद्र प्रसाद केसरवानी बताते हैं कि उन्होंने व्यापार की शुरुआत अकेले की थी। आज उनके सभी स्वजन इस कारोबार से जुड़े हैं। करीब सवा सौ किमी. के दायरे से व्यापारी और ग्राहक उनकी दुकान से सामान खरीदने के लिए आते हैं। वह कहते हैं कि मेहनत से सब कुछ संभव है।

त्रिवेणीपुरम में है प्रतिष्ठान

झूंसी निवासी राजेंद्र प्रसाद केसरवानी की आरपी एसोसिएट्स के नाम से त्रिवेणीपुरम में हार्डवेयर की दुकान है। उनका कजारिया और होम एप्लायंसेज का भी कारोबार है। इनकी दुकान में भवन से संबंधित सभी निर्माण सामग्रियां मसलन ईंट, बालू, सीमेंट, सरिया, कब्जा आदि उपलब्ध हैं। इन्होंने कारोबार के गुर अपने पिता स्वर्गीय राघव प्रसाद केसरवानी से सीखे लेकिन, करीब तीन दशक पहले दुकान अपने बूते खोली। शुरू में व्यापार को स्थापित करने में ढेरों मुश्किलें आईं मगर, मन में दृढ़ इच्छा शक्ति, लगन और ईमानदारी से आज वह सफलता की सीढिय़ों पर बहुत आगे निकल चुके हैं। आज इनका कारोबार सिर्फ जिले तक ही नहीं सीमित है बल्कि, आसपास के जनपदों कौशांबी, प्रतापगढ़, भदोही, जौनपुर के अलावा मध्य प्रदेश में रीवा तक फैला है। 

आरपी नाम से बाजार में बिकती है ईंट

वह बताते हैं कि इनका खुद का ईंट भट्ठा भी है। आरपी नाम से ईंटें भट्टे में तैयार होती हैं और बाजार में इसी नाम से बिकती हैं। कारोबार में करीब पांच साल से बेटों अंबुज और शुभम ने हाथ बंटाना शुरू कर दिया है, जिससे कारोबार का और विस्तार करने में मदद मिली। मूल रूप से हंडिया तहसील के नीमी थरिया गांव के रहने वाले राजेंद्र के छोटे भाई गिरीश चंद्र केसरवानी भी ट्रांसपोर्ट और सीमेंट के व्यवसाय से जुड़े हैं। उनके पास जेके लक्ष्मी सीमेंट का सीएफए है। इनके पूरे स्वजन अभी एक साथ हैं।

नुकसान उठाते हुए स्टॉफ को रखा संतुष्ट

कोरोना महामारी के कारण सरकार की ओर से लगाए गए लॉकडाउन में करीब दो-ढाई महीने दुकान पूरी तरह से बंद रही। इससे कारोबार में नुकसान भी उठाना पड़ा। फिर भी इन्होंने अपने स्टॉफ को पूरी तरह से संतुष्ट रखा। करीब 15 स्थायी स्टॉफ को सकुशल और सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचवाया गया। उनकी पूरी सैलरी का भुगतान किया गया। इसका फायदा यह हुआ कि अनलॉक में जब दुकान खुली तो पूरे स्टॉफ ने दोगुनी क्षमता से काम किया। इसकी वजह से बिक्री घटने की बजाय बढ़ी और लॉकडाउन में कारोबार को हुए नुकसान से ज्यादा की भरपायी हो गई। वह बताते हैं कि उनके यहां संविदा पर करीब 200 से 250 स्टॉफ काम करते हैं। 

अवसर का उठाएं भरपूर लाभ

वह कहते हैं कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। जब तक इसकी वैक्सीन नहीं आ जाती है तब तक कारोबार के लिए संक्रमण से बचाव और सुरक्षा का इंतजाम बहुत जरूरी है। दुकानों को सैनिटाइज कराते हुए स्टॉफ को मास्क, हैंड ग्लब्स आदि मुहैया कराया जाना चाहिए। ग्राहकों को भी बगैर मास्क लगाकर आने पर सामान देने से परहेज करना चाहिए। इससे संक्रमण को रोकने में व्यापारी भी अपनी भूमिका निभाएंगे। यही नहीं, इस विपत्तिकाल को एक सुनहरा अवसर मानते हुए व्यापारियों को इसका भरपूर लाभ उठाना चाहिए और कारोबारियों को पूरी ताकत से कारोबार करना चाहिए। खुद को और अपने देश को आगे बढ़ाना चाहिए।

हम सजाते हैं घर

दुकान मालिक ने बताया कि लोग बड़ी मेहनत से घर बनाते हैं लेकिन हम उसे सजाते हैं। हमारे पास घर की सजावट के लिए टाइल्स की कई वैराइटी है। पिछले कुछ सालों से इनकी डिमांड बहुत है। लोगों की डिमांड के अनुसार सामान मुहैया कराया गया है। कोरोना के दौरान काम प्रभावित हुआ है लेकिन अब त्योहार पर स्थितियां ठीक हुई है।

हार्डवेयर से ईट भट्टे तक का सफर

करीब 30 साल पहले हार्डवेयर की दुकान से शुरुआत करने वाले राजेंद्र ने अपने छोटे भाई के लिए ट्रांसपोर्ट का कारोबार शुरू कराया और ईट भट्टे का संचालन भी प्रारंभ कराया। ट्रांसपोर्टेशन का व्यवसाय शुरू करने का फायदा या हुआ कि व्यापारियों और कस्टमर तक हार्डवेयर और निर्माण सामग्रियों को भिजवाने में सहूलियत हुई। समय से व्यापारियों और ग्राहकों तक सामग्रियां पहुंचने से लोगों का इनके प्रति विश्वास और बढ़ा। इससे कारोबार की वृद्धि में भी इन्हेंं मदद मिली।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.