COVID-19: प्रयागराज से भाजपा के सांसद रहे श्यामाचरण गुप्ता का कोरोना संक्रमण के कारण निधन

प्रयागराज के पूर्व सांसद श्यामाचरण गुप्ता 31 मार्च कोरोना संक्रमित हो गए थे।

ShyamaCharan Gupta कोरोना संक्रमण के बाद बांदा तथा प्रयागराज से सांसद रहे श्यामाचरण गुप्ता को प्रयागराज से नई दिल्ली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां पर उन्होंने कल देर रात दम तोड़ दिया। श्याम ग्रुप के महाप्रबंधक मनोज अग्रवाल ने निधन की पुष्टि की है।

Dharmendra PandeySat, 10 Apr 2021 09:56 AM (IST)

प्रयागराज, जेएनएन। संगमनगरी प्रयागराज के बड़े व्यवसायी और भाजपा से सांसद रहे श्यामाचरण गुप्ता का शुक्रवार देर रात निधन हो गया। कोरोना संक्रमण के बाद बांदा तथा प्रयागराज से सांसद रहे श्यामाचरण गुप्ता को प्रयागराज से नई दिल्ली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां पर उन्होंने कल देर रात दम तोड़ दिया।

श्याम ग्रुप के महाप्रबंधक मनोज अग्रवाल ने निधन की पुष्टि की है। उनका कहना है कि कोरोना पॉजिटिव मिले पूर्व सांसद का दिल्ली के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। गुरुवार रात करीब 11:30 बजे उन्होंने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर प्रयागराज लाने के प्रयास में लगे स्वजन का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन इसका फैसला करेगा। जो निर्णय होगा उसके बाद आगे कदम उठाया जाएगा।

प्रयागराज के पूर्व सांसद श्यामाचरण गुप्ता 31 मार्च कोरोना संक्रमित हो गए थे। उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। कोरोना की रिपोर्ट आने के बाद श्यामाचरण गुप्ता को प्रयागराज में स्वरूपरानी अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया था। वहां तबीयत में सुधार नहीं होने पर दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया जहां उनका इलाज हो रहा था। शुक्रवार शाम अचानक तबीयत ज्यादा बिगड़ गई तो वेंटिलेटर का सपोर्ट दिया गया पर कोई सुधार नहीं हुआ। देर रात को उनका निधन हो गया। पूर्व सांसद की पत्नी भी कोरोना पॉजिटिव हैं। पूर्व सांसद की पत्नी भी होम क्वारंटाइन हैं।

प्रयागराज में श्याम समूह की कंपनियों के संस्थापक और सीएमडी श्यामा चरण गुप्ता 2014 में इलाहाबाद से सांसद थे। उन्होंने 16 वें लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। 1984 में उन्होंने बांदा से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में अपना पहला चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस के भीसन देव दुबे से हार गए। उनके लिए यह नुकसान न के बराबर था, क्योंकि वह बाद में 1989 में इलाहाबाद के मेयर बन गए थे। 1991 में उन्होंने भाजपा के दावेदार के रूप में इलाहाबाद सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और हार गए। उनका राजनीतिक करियर एक दशक से अधिक समय तक निष्क्रिय रहा जिसके बाद उन्होंने 2004 के चुनाव में बांदा सीट से सपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीता। इसके बाद 2009 में फूलपुर से चुनाव हार गए। उन्होंने 2014 के चुनावों में भाजपा उम्मीदवार के रूप में एक सफल अभियान चलाया और इलाहाबाद के सांसद बने। 

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