दोनो पैरों से दिव्यांग अवधेश दे रहे नौनिहालों को निश्शुल्क शिक्षा, प्रतापगढ़ में बिस्तर पर लेटकर चलाते हैं पाठशाला

आपका हौसला हर कठिनाई को हरा सकता है। अपनी जिजीविषा के दम पर प्रतापगढ़ के दिव्यांग अवधेश विश्वकर्मा दूसरों के लिए प्रेरणाश्रोत बन गए हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं कुंडा के रहवई बेला का इंदारा गांव निवासी अवधेश विश्वकर्मा की जो दोनों पैर से दिव्यांग हैं

Ankur TripathiMon, 02 Aug 2021 06:40 AM (IST)
अपनी जिजीविषा के दम पर प्रतापगढ़ के दिव्यांग अवधेश विश्वकर्मा दूसरों के लिए प्रेरणाश्रोत बन गए हैं।

प्रतापगढ़, जागरण संवाददाता। अगर आपके अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो कोई भी कठिनाई आपका रास्ता नहीं रोक सकती। आपका हौसला हर कठिनाई को हरा सकता है। अपनी जिजीविषा के दम पर प्रतापगढ़ के दिव्यांग अवधेश विश्वकर्मा दूसरों के लिए प्रेरणाश्रोत बन गए हैं। जी हां हम बात कर रहे है विकास खंड कुंडा के रहवई बेला का इंदारा गांव निवासी अवधेश विश्वकर्मा की जो दोनों पैर से दिव्यांग हैं। सात भाइयों में छठे नंबर के अवधेश का वर्ष 2009 में एक्सीडेंट हो गया था। इसमें उनकी कमर की हड्डी टूट गई थी। वह तब से बिस्तर पर ही लेटे रहते हैं। उनकी गरीबी का यह आलम है कि सात भाइयों के बीच सिर्फ एक बीघा खेत है, वो भी पिता के नाम पर है। जबकि सभी भाई अलग अलग रहते हैं।

कोरोना काल में शुरू किया पढ़ाना

अवधेश की एक बेटी ममता 15 साल की और एक बेटा शिवम (12) है। यह सब अवधेश की दुश्वारियां बताने के लिए काफी हैं, लेकिन जब कोरोना के चलते दो वर्षों से स्कूल बंद हैं, तब अवधेश गांव के बच्चों को निश्शुल्क शिक्षा देकर ऐसा नेक काम कर रहे हैं, जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। जीवन में अपने पैरों पर खड़े होने की आश छोड़ चुके अवधेश ने तो इंटर तक की पढ़ाई की है। लेकिन करोना काल में ठप बच्चों की पढ़ाई अवधेश को नागवार गुजरी और उन्होंने बिस्तर पर लेटे-लेटे ही बच्चों को निश्शुल्क पढ़ाना शुरू कर दिया। दो बच्चे से शुरू हुई अवधेश की पाठशाला में आज स्वास्तिक, अस्तित्व, रोहित, साक्षी, खुशबू, अभिषेक, नैंसी, सिखा, ममता, शिवम आदि लगभग एक दर्जन बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। पांच सौ महीने की दिव्यांग पेंशन पर गुजर बसर करने वाले अवधेश इन बच्चों को पढ़ाकर काफी फक्र महसूस करते हैं। उनके घर पर रोजमर्रा के खर्च के लिए कमाने के नाम पर सिर्फ उनकी पत्नी नीलम देवी ही हैं, जो गांव में मजदूरी करके किसी तरह अवधेश की दवाई का खर्च व बच्चों के लालन-पालन का खर्च उठा रही हैं।

कौशांबी की बेटी ने विदेश में लहराया परचम

मेहनत और लगन के साथ दृढ़ संकल्प हो तो सफलता के मुकाम को हासिल किया जा सकता है। हालांकि मंजिल तक पहुंचने में तमाम बाधाएं भी आती हैं। लेकिन, इनका सामना कर आगे बढऩे वाले मंजिल तक जरूर पहुंचते हैं। दोआबा की बेटी ने भी संघर्ष कर सफलता पाई।

कौशांबी के मनौरी स्थित महमूदपुर निवासी डा. आराधना कुमारी ने अमेरिका में 28 जून से एक जुलाई तक हुए 15वें अंतरराष्ट्रीय मैथमेटिक्स कांफ्रेंस में प्रतिभाग कर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने ए पार्शीयल नानलीनर एक्सटेंशन आफ़ लेक्स रिक्टम्यार एप्रोक्सिमेशन थ्योरी पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। डा आराधना ने वर्ष 2007 में इविवि से गणित विषय के साथ स्तानक प्रथम श्रेणी में और बेंगलुरू से वर्ष 2011 में टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान(टीआइएफआर) से पोस्ट ग्रेजुएशन गणित विषय के साथ प्रथम श्रेणी में पास किया। इसके बाद अमेरिका पहुंचकर सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयार्क से वर्ष 2016 में शोध पूर्ण किया। वहीं प्रोफेसर के रूप में वर्ष 2017 में नियुक्ति भी मिल गई। शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी है।

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