COVID संक्रमण कम हुआ तो परदेश से आया बुलावा, प्रवासी श्रमिक जुर्माना देकर ट्रेनों में कर रहे सफर

सैदाबाद के रमेश और अमित ने कहा कि ट्रेन में जगह नहीं थी। फिर भी कंपनी से बुलावा आने पर जाना पड़ रहा है। तीन माह से घर पर बेरोजगार बैठे हैं। आर्थिक संकट बढ़ रहा है। ऐसे में टिकट का इंतजार करना और मुश्किल हो रहा था।

Brijesh SrivastavaMon, 21 Jun 2021 12:35 PM (IST)
ट्रेनों में भीड़ का आलम यह है कि प्रवासी श्रमिक जुर्माना देकर सफर कर रहे हैं।

प्रयागराज, जेएनएन। कोरोना वायरस की दूसरी लहर का असर कम हुआ तो लोग रोजगार के सिलसिले में महानगरों की ओर लौटने लगे। ऐसे में ज्यादातर ट्रेनोंं में सीटें फुल हो गई है। कंपनी या फैक्ट्री से बुलावा आने पर प्रवासी श्रमिक कंफर्म टिकट का इंतजार नहीं कर रहे हैं। वे ट्रेन में सवार होकर मुंबई और दिल्ली की ओर रवाना हो रहे हैं। ट्रेनों में जुर्माना देकर सफर कर रहे हैं। हालांकि इस दौरान ट्रेनों में कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन भी नहीं किया जा रहा है।

महानगरों की ओर जाने वाली ट्रेनों में भीड़, कोविड प्रोटोकाल का उल्‍लंघन भी

दरअसल, महानगरों से बुलावा आने और आर्थिक संकट बढऩे पर लोग महानगरों की ओर लौटने लगे हैं। वहीं, ट्रेनों में जगह न होने के बावजूद लोग सफर कर रहे हैं। भीड़ बढऩे की वजह से फिजिकल डिस्टेंसिंग यानी शारीरिक दूरी का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। यह लापरवाही फिर भारी पड़ सकती है। क्योंकि कोरोना का असर कम हुआ है समाप्त नहीं हुआ है।

कंफर्म टिकट का इंतजार करने का वक्‍त नहीं है

लोकमान्य तिलक टर्मिनल जाने वाली ट्रेन में जंक्शन पर इस कदर भीड़ दिख रही है कि मानो कोरोना अब समाप्त हो गया है। सैदाबाद के रमेश और अमित का कहना है कि ट्रेन में जगह नहीं थी। फिर भी कंपनी से बुलावा आने पर जाना पड़ रहा है। तीन माह से घर पर बेरोजगार बैठे हैं। आर्थिक संकट बढ़ रहा है। ऐसे में टिकट का इंतजार करना और मुश्किल हो रहा था। टीटीई को एक हजार रुपये जुर्माना भरकर टू एस कोच से करीब आठ लोग जाएंगे। सभी ने जुर्माना भर दिया है, ताकि रास्ते में दिक्कत न हो। इस तरह कई प्रवासी श्रमिक जुर्माना भरकर प्रतिदिन सफर कर रहे हैं।

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