सीएमओ से नहीं मिल पाते और मायूस होकर लौट जाते हैं फरियादी Prayagraj News

प्रयागराज, जेएनएन। दूर-दूर के ग्रामीण क्षेत्रों से अपने कार्य के लिए आने वाले लोगों की सीएमओ कार्यालय में दिक्कत उठानी पड़ती है। वह प्रमाणपत्र बनवाने के लिए परेशान होते हैं। इधर से उधर चक्कर काटते हैं। वहीं जब सीएमओ से शिकायत करने जाते हैं तो मुलाकात नहीं हो पाती। इससे वह अपनी फरियाद भी नहीं सुना पाते। क्‍योंकि उनके चेंबर का मुख्य दरवाजा हमेशा अंदर से बंद रहता है।

गजाधर दिव्‍यांग बेटे का प्रमाणपत्र बनवाने भटकते रहे

इस बात का नमूना भी समय-समय पर नजर आ ही जाता है। बहरिया विकास खंड के सिकंदरा निवासी गजाधर प्रसाद मिश्र (75) के बेटे नीरज की मानसिक स्थित ठीक नहीं है। डॉक्टर ने भी इसको प्रमाणित किया है। गजाधर नीरज व पौत्र सूरज को लेकर रविवार आधी रात के बाद ही घर से सीएमओ आफिस के लिए निकले थे ताकि सोमवार को उन्हें प्रमाणपत्र मिल जाए। सोमवार सुबह आफिस का गेट खुला तो वह बेटे को लेकर लोगों से पूछने लगे कि वह इसके लिए कहां जाएं। हर कोई सीएमओ के आने की बात कहता रहा। सीएमओ आए और चले भी गए लेकिन गजाधर का काम नहीं हुआ। इसी तरह बहरिया के रामसजीवन, अंशू पाल, अमित कुमार भी मानसिक दिव्यांगता का प्रमाण पत्र लेने के लिए भटकते रहे।  

सरकार के आदेश का पालन नहीं हो रहा है

सरकार का स्पष्ट आदेश है कि सभी अफसर सुबह दस बजे से 12 बजे तक अपने कार्यालय में जनता की फरियाद सुनेंगे और उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे। सीएमओ आफिस में व्यवस्था इससे इतर है। लोगों का कहना है कि सीएमओ के चेंबर का मेन दरवाजा हमेशा अंदर से बंद रहता है। वीआइपी लोगों के लिए पीछे का रास्ता खुला होता है। सोमवार को भी यही आलम रहा।

अपनी सफाई में बोले सीएमओ

 सीएमओ डॉ. जीएस बाजपेई ने अपनी सफाई में कहा कि मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए कोई हमसे क्यों मिलेगा। इसके लिए तो अलग कक्ष बनाया गया है। हम दो बजे तक अपने ऑफिस में थे कोई ऐसी बात नहीं थी। हो सकता है कोई लोगों को घुमा रहा हो।

 

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