शिक्षा का केंद्र : कल आज और कल

दैनिक जागरण की ओर से शनिवार को होटल मिलेनियम इन में शिक्षा का केंद्र कल आज और कल जागरण विमर्श में शिक्षाविदों ने अपनी बात बेबाकी से रखी। शिक्षाविदों ने गुवत्तापरक शिक्षा पर जोर देते हुए शिक्षा की संभावनाओं को वैश्विक पटल पर ले जाने के लिए कार्य करने का संकल्प भी लिया।

JagranSun, 17 Oct 2021 02:23 AM (IST)
शिक्षा का केंद्र : कल आज और कल

गुरुदीप त्रिपाठी, प्रयागराज : दैनिक जागरण की ओर से शनिवार को होटल मिलेनियम इन में शिक्षा का केंद्र : कल आज और कल जागरण विमर्श में शिक्षाविदों ने अपनी बात बेबाकी से रखी। शिक्षाविदों ने गुवत्तापरक शिक्षा पर जोर देते हुए शिक्षा की संभावनाओं को वैश्विक पटल पर ले जाने के लिए कार्य करने का संकल्प भी लिया। गोविद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर बद्रीनारायण तिवारी ने कहा आधुनिकता के साथ शहर का तन भले बढ़ रहा है पर मन में क्षरण है। नई शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए कहा कि शब्द नए आ रहे हैं लेकिन उनका मूर्तरूप देने वाले पुराने हैं। उन्हें नए शब्दों का बोध ही नहीं है। कौशल को बढ़ावा देने वाले विषय पढ़ाए जाने चाहिए। कौशल का तात्पर्य केवल कंप्यूटर, सिलाई और कढ़ाई नहीं है।

प्रोफेसर बद्रीनारायण ने कहा जिनके पास अनुभव है, उनके पास ज्ञान नहीं और जिनके पास ज्ञान है, उनके पास अनुभव नहीं। दोनों का तालमेल यदि साथ हो तो शिक्षा के स्तर को आसानी से सुधारा जा सकता है। शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए गुरु गोरखनाथ की आवश्यकता है। ऐसे गोरखनाथ की जो बदलाव ला सके। जो बने बनाए ढांचे को उलटकर नई अवधारणाएं रख सके। इसके लिए शिक्षा का समझना होगा, योजना बनाना होगा फिर उसे लागू कर छात्रों को शिक्षित करना होगा। उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि प्रयाग शिक्षा की राजधानी रही है। महर्षि भारद्वाज प्राचीन भारत के पहले कुलपति थे।इसके बाद महामना मदन मोहन मालवीय। कुलपति बनने का अधिकार उसे है, जो एक साथ दस हजार विद्यार्थियों को शिक्षा देने में सक्षम हो। वर्तमान प्रणाली पर चिता जताते हुए कहा जब तक विश्वविद्यालय के हाथ में उसकी व्यवस्था रही, तब तक शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम गढ़े गए। अफसोस अब इसमें राजनीति का हस्तक्षेप है। इसके दोषी भी विश्वविद्यालय हैं। पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल पंडित केशरी नाथ त्रिपाठी ने कहा इलाहाबाद विश्वविद्यालय को पहले पूरब का आक्सफोर्ड कहा जाता था। आखिर वहां से तुलना क्यों की जाती है। इसके लिए यूके और कैंब्रिज गया तो दोनों जगहों के वातावरण में अंतर देखने को मिला। छात्रों के चेहरे पर जानने की इच्छा साफ झलकती थी। यहां विस्तार तो हुआ लेकिन गुणवत्ता में नहीं। गुणवत्ता की तिलांजलि देकर शिक्षा का विकास नहीं किया जा सकता है। हैरानी वाली बात है कि शोध का स्तर महज चार फीसद है। ऐसे में कैसे वैश्विक पटल पर पहचान बनाने में कामयाब हो सकेंगे। पीएचडी कराएं तो उसमें संख्यावृद्धि की जगह गुणवत्ता को परखें। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह ने कहा कोरोनाकाल में शिक्षा सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। उस कालखंड में केवल दूरस्थ शिक्षा ही सहारा बना। इस अवधि में मुक्त विश्वविद्यालय ने छात्रों के घर तक शिक्षा पहुंचाने का कार्य किया। सत्र के दौरान वह वर्तमान व्यवस्था से असंतुष्ट नजर आईं। कह अब शोध प्रभावी नहीं किए जा रहे हैं। केवल नाम के आगे डाक्टर लिखने के लिए शोधकार्य हो रहे हैं। यह धारणा बदलकर कल को संवारा जा सकता है। इस सत्र का माडरेटरिग दैनिक जागरण के आउटपुट हेड वरिष्ठ पत्रकार श्याम मिश्र ने की। इनको मिला सम्मानइस सत्र में बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत नीलिमा श्रीवास्तव और सत्य प्रकाश को सम्मानति भी किया गया। इन दोनों शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा विभाग में उत्कृष्ट कार्य कर शिक्षा जगत का मान बढ़ाया है।

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