इविवि में पीएचडी प्रवेश में धांधली का मामला, यूजीसी ने प्रोफेसर के खिलाफ की गंभीर टिप्पणी

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पर गंभीर टिप्पणी की है।

JagranSun, 25 Jul 2021 12:56 AM (IST)
इविवि में पीएचडी प्रवेश में धांधली का मामला, यूजीसी ने प्रोफेसर के खिलाफ की गंभीर टिप्पणी

जागरण संवाददाता, प्रयागराज : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (इविवि) को पत्र भेजकर शारीरिक शिक्षा विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर डीसी लाल के खिलाफ गंभीर टिप्पणी की है। पत्र में कहा गया है कि प्रोफेसर डीसी लाल ने पद का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर अनियमितता की। साथ ही सरकारी धन की हेराफेरी भी की। रजिस्ट्रार प्रोफेसर एनके शुक्ल को भेजे गए पत्र में यूजीसी ने मामले में कार्रवाई करने के साथ विभाग से गायब पीएचडी परिणाम और प्रकरण की रिपोर्ट भी तलब की है।

इविवि के शारीरिक शिक्षा विभाग में सत्र 2019-20 के लिए पीएचडी में चार सीटों पर प्रवेश के लिए आवेदन मांगे गए थे। परिणाम जारी होने पर अभ्यर्थी मोहम्मद शाबिर ने तत्कालीन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डीसी लाल पर धांधली का आरोप लगाते हुए यूजीसी से शिकायत कर दी। बाद में पता चला के परीक्षा परिणाम ही गायब हो गए तो मामले में कमेटी भी गठित कर दी गई। अब शुक्रवार को 71वीं बार शिकायत की गई। इससे पहले यूजीसी ने रजिस्ट्रार प्रोफेसर एनके शुक्ल को पत्र भेजकर प्रोफेसर डीसी लाल के खिलाफ गंभीर टिप्पणी की। 71वीं बार शिकायत में शाबिर ने रजिस्ट्रार पर प्रोफेसर डीसी लाल को बचाने का आरोप लगाते हुए मामले में लीपापोती करने का आरोप लगाया है। साथ ही प्रोफेसर डीसी लाल की तरफ से रजिस्ट्रार के खिलाफ की गई अमार्यादित टिप्पणी की भी शिकायत की है। मामले में यूजीसी ने इविवि प्रशासन से जवाब तलब किया है। इस संदर्भ में पीआरओ डाक्टर जया कपूर का कहना है कि यूजीसी के पत्र का जवाब भेजा जा रहा है। शारीरिक शिक्षा विभाग के मुद्दे पर गठित समिति की संस्तुति के अनुसार क्रेट 2019-20 लेवेल-2 के दोबारा आयोजन की प्रक्रिया शुरू करी जा चुकी है। वर्जन

अभी मेरे पास यूजीसी का कोई पत्र नहीं आया है। मो. शाबिर विभाग की प्रो. अर्चना चहल के द्वारा नियुक्त कोच हैं। जिस सत्र में इन्होंने आवेदन किया था, उसका पूरा अभिलेख रजिस्ट्रार के पास भेज दिया गया है। यदि परीक्षा परिणाम गायब है तो इसके जिम्मेदार रजिस्ट्रार हैं।

- प्रोफेसर डीसी लाल, तत्कालीन विभागाध्यक्ष।

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