भाजपा काशी प्रांत के उपाध्यक्ष अवधेश गुप्त बोले- पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हो रही है हत्या

भाजपा काशी प्रांत के उपाध्‍यक्ष अवधेश गुप्‍ता ने पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा पर क्षोभ व्‍यक्‍त किया।

भाजपा काशी प्रांत के उपाध्‍यक्ष अवधेश गुप्‍ता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में यह सब घुसपैठियों की सह पर हो रहा है। इससे देश की एकता और शांति को खतरा पैदा हो चुका है। किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री यदि इस तरह का बर्ताव कर रहा है यह शर्मनाक है।

Brijesh SrivastavaWed, 05 May 2021 03:40 PM (IST)

प्रयागराज, जेएनएन। पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजे आने के बाद आधा दर्जन भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। तमाम महिला कार्यकर्ताओं को घर में घुसकर मारा जा रहा है। लोगों के घरों में आग लगाई जा रही है। दुकान और कार्यालय भी तोड़े जा रहे हैं। लोकतंत्र का इससे वीभत्स स्वरूप पूरे देश में कहीं नहीं दिखा। यह कहना है भाजपा काशी प्रांत के उपाध्यक्ष अवधेश गुप्त का।

देश की एकता और शांति को खतरा पैदा हो चुका है

भाजपा काशी प्रांत के उपाध्यक्ष ने कहा कि चुनाव से पूर्व भी भाजपा के कई कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार दिया गया था। यह सब तृणमूल कांग्रेस मुखिया ममता बनर्जी के नेतृत्व में हो रहा है। वह खुले तौर पर भारत सरकार को चुनौती दे रही हैं। यहां तक कि संविधान को भी न मानने पर उतारू हैं। यह सब घुसपैठियों की सह पर हो रहा है। इस हरकत से देश की एकता और शांति को खतरा पैदा हो चुका है। किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री यदि इस तरह का बर्ताव कर रहा है, यह शर्मनाक है।

पूर्व जिलाध्‍यक्ष ने कहा, ममता ने रवींद्र नाथ टैगोर की धरती पर लगाया धब्बा

भाजपा नेता अवधेश गुप्त ने कहा कि हमारा देश महात्मा गांधी, रवींद्र नाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलने वाला है। उसके बाद भी हिंसा, हत्या, दुष्‍कर्म जैसी घटनाएं हो रही हैं। यह सब राजनीतिक संरक्षण में हो रहा है। यह कहना है भाजपा की पूर्व जिला अध्यक्ष व प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य शिश वार्ष्‍णेय का। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की गतिविधियों से रवींद्र नाथ टैगोर की धरती पर धब्बा लगा है। इतनी बड़ी तादात में हिंसा होना बताता है कि हर तरफ अराजकता का माहौल है। भाजपा इसी माहौल के खिलाफ लड़ रही थी। आगे भी यह लड़ाई जारी रहेगी। स्थितियों को सुधारने के लिए तमाम बलिदान देने पड़ते हैं। भाजपा तो बलिदानियों की पार्टी है। चाहे वह श्याम प्रसाद मुखर्जी हों या फिर पं दीन दयाल उपाध्याय। हम सब देश को एकता के सूत्र में पिरोने व राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए लड़ते आए हैं, आगे भी लड़ेंगे।

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