बाबा पांडेश्वरनाथ पूरी करते हैं सभी भक्तों की मुराद, जानिए कहां है प्रयागराज में यह प्राचीन मंदिर

यहां श्रद्धाभाव और शुद्ध मन से बाबा का दर्शन-पूजन करने से हर मनोकामना पूरी होती है।

पांडेश्वरनाथ मंदिर को स्थानीय लोग पडि़ला महादेव मंदिर के नाम से ज्यादा जानते हैं। इस प्राचीन मंदिर की गिनती प्रयाग के पंचकोसी परिक्रमा में होती है। बीस कोस की यह परिक्रमा इस शिव मंदिर में दर्शन-पूजन के बिना पूरी नहीं मानी जाती है। इसकी प्रसिद्धि कई जिलों में है

Ankur TripathiThu, 04 Mar 2021 02:40 PM (IST)

प्रयागराज, जेएनएन। तीर्थराज प्रयाग में कई ऐसे ऐतिहासिक और पौराणिक देवस्थान मौजूद हैं जिनकी जनमानस में विशेष मान्यता है। ऐसा ही एक दिव्य स्थल प्रयागराज के जिला मुख्यालय से तकरीबन 16-17 किलोमीटर की दूरी पर पडि़ला महादेव के नाम से मशहूर है। लोग इसको पांडेश्वरनाथ धाम के नाम से भी जानते हैं। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यहां पर शुद्ध मन से मांगी गई हर मुराद बाबा भोलेनाथ पूरा करते हैं। बाबा के दर्शन-पूजन के लिए साल भर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।  
द्वापर युग में पांडवों ने स्थापित किया था यहां शिवलिंग
पडि़ला महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी सच्चिदानंद पांडेय का कहना है कि इस मंदिर को किसने बताया इसका पता तो नहीं चलता लेकिन जनश्रुति है कि द्वापर युग में इसका निर्माण पांडवों ने कराया था, बुजुर्ग बताते हैं कि महाभारत काल में जब पांडव अज्ञातवाश में यहां-वहां विचरण कर रहे थे तो इस क्षेत्र में भी आए थे। यहां रुकने के दौरान उनको एक स्वयंभू शिवलिंग मिले जिसे इसी स्थान पर उन्होंने स्थापित करके पूजन किया था, कालांतर में यहां मंदिर बना था। जिसके चलते इसको पांडेश्वरनाथ मंदिर कहा जाने लगा। यहां श्रद्धाभाव और शुद्ध मन से बाबा का दर्शन-पूजन करने से हर मनोकामना पूरी होती है।

प्रयाग की पंचकोसी परिक्रमा में शामिल है यह शिव मंदिर
पांडेश्वरनाथ मंदिर को स्थानीय लोग पडि़ला महादेव मंदिर के नाम से ज्यादा जानते हैं। इस प्राचीन मंदिर की गिनती प्रयाग के पंचकोसी परिक्रमा में होती है। बीस कोस की यह परिक्रमा इस शिव मंदिर में दर्शन-पूजन के बिना पूरी नहीं मानी जाती है। इसकी प्रसिद्धि आसपास के कई जिलों में है। यहां दर्शन-पूजन के लिए प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अमेठी, जौनपुर, रायबरेली, भदोही, वाराणसी, चित्रकूट, कौशांबी जिलों के लोग भी आते हैं। सावन के महीने में पूरे माह यहां कांवरिए गंगाजल, ध्वजा-पताका, बेलपत्र, धतूरा आदि लेकर महादेव का दर्शन और जलाभिषेक करने आते हैं।

सावन मास और महाशिवरात्रि पर लगता है यहां पर मेला
पडि़ला महादेव मंदिर में वैसे तो साल भर शिवभक्त आते रहते हैं किंतु सावन मास व महाशिवरात्रि के दिन यहां भारी भीड़ उमड़ती है। सावन में माहभर और शिवरात्रि पर तीन दिन का यहां पर मेला लगता है। पुरुषोत्तम मास में भी श्रद्धालु यहां दूर-दराज से जलाभिषेक के लिए आते हैं। सोमवार को भी श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में उमड़ती है। कांवरिए भारी संख्या में जलाभिषेक के लिए आते हैं।

पांडेश्वरनाथ के साथ विराजमान हैं यहां अन्य देवी-देवता
मंदिर परिसर दो-तीन एकड़ में विस्तृत है। पांडेश्वरनाथ शिवलिंग मुख्य मंदिर में विराजमान हैं जबकि आसपास बने अन्य मंदिरों में मां पार्वती, काल भैरव, श्रेगणेश, संतोषी माता, शीतला माता और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैंैं। मंदिर के पीछे की तरफ बाबा शंभू गिरी की समाधि बनी है।

जल और बेलपत्र पर प्रसन्न हो जाते हैं पांडेश्वरनाथ
पुजारी सच्चिदानंद कहते हैं कि बाबा बड़े दयालु हैं वे केवल जल और बेल पत्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं। स्थानीय लोग शादी-ब्याह आदि से पहले शिव को प्रसन्न करने और व्याधि-बाधा दूर करने के लिए बाबा को निशान पताका और घंटा आदि भी चढ़ाते हैं। मन्नत पूरी होने के बाद भी लोग यहां आकर बाबा के दर्शन-पूजन करते हैं।

हर वर्ग के ठहरने के लिए यहां पर निर्मित हैं धर्मशालाएं
समाज के हर वर्ग के लोगों को ठहरने के लिए मंदिर के आसपास धर्मशाला की भी व्यवस्था है। यहां पर ठहरने की व्यवस्था के साथ ही खानपान का भी इंतजाम रहता है। जगह-जगह प्याऊ भी लगे हैं। पुजारी कृष्ण कुमार गिरि बताते हैं कि यह मंदिर बहुत सिद्ध है, यहां पर आने वालों की झोली कभी खाली नहीं रहती है। पडि़ला महादेव सभी की मुराद पूरी करते हैं। कहा कि जो भी भक्त यहां 40 दिनों तक बाबा का जलाभिषेक और पूजन करता है तो उसकी सभी मनौती पूरी होती है। इसके पीछे जनश्रुति है कि श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने यहां पर शिवलिंग स्थापित कर 40 दिनों तक पूजा की थी जिससे प्रसन्न होकर शिव ने पांडवों को दर्शन दिया था।

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