कुंभ और माघ मेले को 79 साल से आवाज दे रही प्रयागराज की आशा एंड कंपनी

आशा एंड कंपनी ने 79 साल पहले 1942 के कुंभ मेले में चार लाउडस्पीकर से 'आवाज का सफर शुरू किया

आशा एंड कंपनी ने प्रयागराज में 79 साल पहले 1942 के कुंभ मेले में चार लाउडस्पीकर से आवाज का अपना सफर शुरू किया था जो आज कई हजार लाउडस्पीकरों तक पहुंच गई है। प्रयागराज ही नहीं अब तो उज्जैन कुंभ में भी आशा कंपनी लाउड स्पीकर की आपूर्ति करती है।

Publish Date:Sat, 16 Jan 2021 07:00 AM (IST) Author: Ankur Tripathi

प्रयागराज, जेएनएन। प्रयागराज में संगम की रेती पर हर साल लगने वाला माघ मेला हो अथवा प्रत्येक छह साल पर लगने वाला अर्धकुंभ या हर बारह साल बाद आयोजित होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा मेला कुंभ हो। सभी को आशा एंड कंपनी ही 'आवाज देती है। संगम क्षेत्र में इसी लाउडस्पीकरों से श्रद्धालुओं के कानों तक कर्ण प्रिय भजन के अलावा मेले में भूले-भटकों संबंधी घोषणाओं के अलावा ट्रैफिक  डायवर्जन किए जाने जैसे अहम संदेश पहुंचते हैं। संस्था यह काम पिछले 79 साल से पूरे मनोयोग से कर रही है।

1942 में चार लाउडस्पीकरों से शुरू हुआ था सफर

आशा एंड कंपनी ने प्रयागराज में 79 साल पहले 1942 के कुंभ मेले में चार लाउडस्पीकर से 'आवाज का अपना सफर शुरू किया था, जो आज कई हजार लाउडस्पीकरों तक पहुंच गई है। प्रयागराज ही नहीं अब तो उज्जैन कुंभ में भी आशा कंपनी ही लाउड स्पीकर की आपूर्ति करती है। कंपनी के मालिक प्रवीण मालवीय के अनुसार हरिद्वार में होने वाले कुंभ में भी संस्था 1956 से लाउडस्पीकर लगा रही है। कंपनी की स्थापना बाबा स्व.नित्यानंद मालवीय ने प्रयागराज शहर के जानसेनगंज इलाके में की थी, अब अन्य शाखाएं भी हैं।

  

लिम्का बुक ऑफ रिकाड्र्स में भी दर्ज है संस्था का नाम

प्रवीण मालवीय बताते हैं कि 2007 में प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेले में आशा एंड कंपनी ने छह हजार लाउड स्पीकर लगाए थे। इसके लिए करीब 91 किलोमीटर की वायरिंग मेला क्षेत्र में दौड़ाई गई थी। हमारी इस उपलब्धि को 2008 में लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में स्थान प्रदान किया गया।

कुंभ 2019 में लगाए थे छह हजार से अधिक लाउडस्पीकर  

प्रयागराज में 2019 में आयोजित कुंभ मेले में तमाम उद्घोषणा और कर्णप्रिय भजनों को श्रद्धालुओं तक पहुंचाने के लिए मेला क्षेत्र में आशा एंड कंपनी ने लगभग 6,700 लाउडस्पीकर लगाए थे जिनसे मेले में टै्रफिक डायवर्जन संबंधी और अन्य उद्घोषणाओं में प्रशासन को काफी आसानी हुई थी।  

इंजीनियर्स और साउंड टेक्नीशियन की है अनुभवी टीम

मालवीय कहते हैं कि कुंभ या माघ मेले का आयोजन बहुत बड़े क्षेत्रफल में होता है जिसमें लाउडस्पीकर का संजाल फैलाना मुश्किल व श्रमसाध्य होता है इसके लिए तकनीकी जानकारी के साथ पर्याप्त अनुभव की भी दरकार होती है, इसके लिए हमारे पास पर्याप्त अनुभवी इंजीनियर्स, साउंड टेक्नीशियन की टीम है जो अपनी कार्यकुशलता से इस मुश्किल काम को आसान करते हैं।

दूसरे प्रदेशों तक भी पहुंची आशा एंड कंपनी की धमक  

अब बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड जैसे प्रदेशों में भी आशा एंड कंपनी की आवाज गूंजती है। 2008 में गुरु ग्रंथ साहिब की 300वीं सालगिरह के मौके पर महाराष्ट्र के नांदेड़ के पास सिखों के चौथे पवित्र स्थल तख्त श्री सचखंड साहिब में आयोजित समारोह में भी संस्था ने लाउडस्पीकर लगाए थे।

रामजन्मभूमि शिलान्यास समारोह में भी दी थी 'आवाज

प्रयागराज स्थित आशा एंड कंपनी ने अयोध्या में रामजन्मभूमि के शिलान्यास समारोह में भी लाउडस्पीकर लगाए थे। शिलान्यास पांच अगस्त को किया गया था लेकिन आयोजन तीन अगस्त से ही शुरू हो गया था। प्रवीण मालवीय ने बताया कि इस तीन दिवसीय आयोजन में अयोध्या से फैजाबाद के बीच करीब 12 किमी. दूरी में तीन हजार से अधिक लाउडस्पीकर लगाए गए थे जिनसे पूरा कार्यक्रम अयोध्या और फैजाबाद की जनता तक पहुंचाया गया। प्रयागराज में 2021 में कोरोना संक्रमण के प्रभाव के बीच आयोजित किए गए माघ मेले में दो हजार लाउडस्पीकर लगाए गए हैं।

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