नाराज जीआइसी शिक्षकों ने उठाया सवाल, राजकीय माध्यमिक में खत्म क्यों नहीं कर देते संवर्ग

बेसिक के खंड शिक्षा अधिकारियों की संख्या अधिक होने के दावे को राजकीय शिक्षक संघ पाण्डेय गुट नहीं स्वीकारता। संघ के प्रांतीय महामंत्री रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय बताते हैैं कि राजकीय माध्यमिक शिक्षा विभाग में ग्रेड पे 4800 के हजारों प्रवक्ता पद हैं।

Ankur TripathiFri, 08 Oct 2021 03:09 PM (IST)
जीआइसी में बने संवर्ग शिक्षण, प्रशिक्षण और निरीक्षण से प्रगति के मौके कम

प्रयागराज, राज्य ब्यूरो। उत्तर प्रदेश शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा समूह-ख उच्चतर पदों पर निर्धारित पदोन्नति कोटा संशोधन की कोशिश को जीआइसी के शिक्षक अपने साथ साजिश बता रहे हैं। सवाल उठाया है कि जब राजकीय माध्यमिक विद्यालयों (जीआइसी) में शिक्षण, प्रशिक्षण और निरीक्षण के अलग-अलग संवर्ग (कैडर) हैं तो माध्यमिक शिक्षा के समूह ख के पदों पर बेसिक के समूह ग वर्ग की पदोन्नति क्यों की जा रही है? इस तरह विभागीय पदोन्नति नियमावली का अतिक्रमण कर घालमेल करने के बजाय कैडर को ही क्यों नहीं खत्म कर दिया जाता, ताकि उनकी प्रगति का भी दायरा बढ़ सके।

 

माध्यमिक के पदों पर पदोन्नत करना बड़ा षडय़ंत्र

बेसिक के खंड शिक्षा अधिकारियों की संख्या अधिक होने के दावे को राजकीय शिक्षक संघ पाण्डेय गुट नहीं स्वीकारता। संघ के प्रांतीय महामंत्री रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय बताते हैैं कि राजकीय माध्यमिक शिक्षा विभाग में ग्रेड पे 4800 के हजारों प्रवक्ता पद हैं। एलटी के चयन वेतनमान प्राप्त शिक्षकों की संख्या भी हजारों में है, जो पहले से ही पदोन्नति में विभागीय उपेक्षा के चलते पिछड़े हुए हैैं। हकीकत यह भी है कि अधिकांश तो बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैैं। ऐसी स्थिति में पदोन्नति नियमावली में संशोधन कर बेसिक शिक्षा के खंड शिक्षा अधिकारियों को माध्यमिक के पदों पर पदोन्नत करना बड़ा षडय़ंत्र है। 

जीआइसी में संवर्ग ही खत्म क्यों नहीं कर देता शासन

महामंत्री पाण्डेय कहते हैैं कि यदि शासन जबरन ऐसा करना ही चाह रहा है तो उसके पहले जीआइसी में संवर्ग ही ख्रत्म क्यों नहीं कर देता। इससे जीआइसी शिक्षक भी बेसिक शिक्षा में जा सकेंगे। इसके साथ ही राजपत्रित पद 5400 ग्रेड पे पर प्रमोशन पाकर डायट, सीटी, मनोविज्ञान शाला, राज्य विज्ञान संस्थान, राज्य शिक्षा संस्थान, परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) में जा सकेंगे। इस तरह विकल्प अधिक मिल सकेंगे। अभी संवर्ग लागू होने से राजपत्रित में हाईस्कूल का प्रधानाचार्य या बोर्ड में उप सचिव बनाया जाता है।

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