Anand Giri के चेहरे पर आ गई थी कोर्ट में भीड़ देखकर शिकन, कोर्ट में टूटी कुर्सियां-मेज

न्यायालय परिसर पहुंचते ही वकीलों और दूसरे लोगों की भीड़ जुट गई। उनके चेहरे का भाव बताने लगा कि अब वह मुल्जिम बन गए हैं। शोरगुल के बीच जैसे ही आनंद गिरि ने कोर्ट रूम जाने के लिए सीढिय़ों पर पैर रखा वहां की भीड़ देख कांप उठा।

Ankur TripathiThu, 23 Sep 2021 05:00 AM (IST)
भीड़ देख आद्या तिवारी भी हो गया भयभीत, धक्कामुक्की के साथ मारो-मारो का हल्ला

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। गजब का रसूख। सैकड़ों अनुयायी। विलासी जीवन। मगर अचानक हुई गुरू नरेंद्र गिरि की मौत ने शिष्य आनंद गिरि की जिंदगी को अर्स से फर्श पर ला दिया। घंटों पुछताछ के बाद विशेष जांच दल (एसआइटी) बुधवार अपरान्ह करीब साढ़े तीन बजे आनंद और आद्या को लेकर बेली अस्पताल पहुंची। मेडिकल कराने के करीब 20 मिनट बाद पहले ट्रामा केयर सेेंटर से आद्या को बाहर निकाला गया। उसका चेहरा लटका हुआ था। फिर पुलिसकर्मियों के सुरक्षा घेरे में बाहर आते ही आनंद गिरि ने एक हाथ उठाकर वहां मौजूद लोगों का अभिवावाद स्वीकार किया। एसआइटी के सदस्यों और पुलिस के जवानों ने दोनों को अलग-अलग प्रिजन वैन में बैठाया और फिर हूटर बजाती हुई गाडिय़ां जिला अदालत पहुंच गईं।

मारो-मारो का शोर सुनकर दिखी चेहरे पर घबराहट

न्यायालय परिसर में पहुंचते ही वकीलों और दूसरे लोगों की भीड़ जुट गई। उनके चेहरे का भाव साफ तौर पर बताने लगा कि अब वह मुल्जिम बन गए हैं। शोरगुल के बीच जैसे ही आनंद गिरि ने कोर्ट रूम जाने के लिए सीढिय़ों पर पैर रखा, वहां की भीड़ देख कांप उठा। आद्या तिवारी भी भयभीत हो गया। मजिस्ट्रेट के सामने दोनों आरोपितों को पेश करने के बाद पुलिस ने जब कोर्ट रूम से उन्हें बाहर निकाला तो धक्का मुक्की शुरू हो गई। कुछ लोगों ने मारो-मारो का हल्ला मचाया तो पुलिसकर्मी सांसत में पड़ गए। एसआइटी, क्राइम ब्रांच और पुलिस के जवानों ने किसी तरह दोनों को बाहर निकाला और फिर दोबारा प्रिजन वैन में बैठाया। उसमें चढ़ते ही आनंद गिरि का चेहरा पूरी तरह उदास था। आंखों में अनजान डर जैसा नजर आ रहा था। आद्या का भी ऐसा ही कुछ हाल रहा। शाम को कचहरी से कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों मुल्जिमों को नैनी सेंट्रल जेल ले जाकर दाखिल किया गया। उधर, कोर्ट में भीड़ की आपाधापी से कई कुर्सियां और मेज टूट गई जिन्हें बाद में पुलिस ने ठीक कराया।

पैर छूने वाले हाथों ने नमस्ते नहीं किया

कोर्ट रूम के बाहर मौजूद एक अधिवक्ता को आनंद गिरि की हालत पर तरस आ गया। उन्होंने अपने साथी से कहा कि देखिए यहां मौजूद कुछ शख्स जो आनंद गिरि के कभी पैर छूते थे, आज नमस्ते करने के लिए भी नहीं उठे। यही होता है जिंदगी का फलसफा। आनंद पर अपने ही गुरू नरेंद्र गिरि को आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करने का आरोप है। ऐसा ही आरोप मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या पर भी है।

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