राहुल की चुप्पी यूपी चुनाव से किनारा तो नहीं, प्रयागराज से वापसी के बाद लगाए जा रहे कयास

राहुल प्रयागराज से रविवार रात वाराणसी निकल गए। वहां भी उनका कोई राजनैतिक कार्यक्रम नहीं है। रात्रि विश्राम के बाद दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे। यह खामोशी और सिमटा दायरा तमाम सवालों और आशंकाओं को जन्म दे रहा है। सियासी गलियारे में इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।

Ankur TripathiMon, 06 Dec 2021 09:20 AM (IST)
चुनावी मौसम में राुहल गांधी की खामोशी और सिमटे दायरे से उठे सवाल

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक है। विभिन्न राजनैतिक दलों के दिग्गज आए दिन सियासी दौरा कर रहे हैं। वह एक-दूसरे पर सियासी हमले भी कर रहे हैं। इन सबके बीच अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी सियासी सवालों पर चुप्पी तोड़ने को राजी नहीं हुए। यह पार्टी के लिए सही संकेत भी नहीं माने जा रहे हैं। हालांकि, कांग्रेसी इसे निजी दौरा बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।

प्रियंका का बढ़ा यूपी में दखल तो राहुल हैं एकदम से नदारद

कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने उत्तर प्रदेश में अपनी दखल को बढ़ाया है। किसानों का मुद्दा हो, बेरोजगारी का मुद्दा हो, पेटोल की कीमत बढ़ने का मामला हो, लखीमपुर खीरी में किसानों की मौत का प्रकरण, यहां तक कि फाफामऊ में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या का मामला हो। सभी में प्रियंका ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसे लेकर वह लगातार सुर्खियों में भी हैं। दूसरी तरफ राहुल किसी भी प्रकरण में नजर नहीं आ रहे हैं। संगमनगरी आकर भी वह चुप रहे। न तो पार्टी कार्यकर्ताओं से कोई खास मुलाकात की और यहां तक कि संगठन की गतिविधि को भी टटोलने का प्रयास नहीं किया। उनका दौरा सिर्फ चंद्रा परिवार तक ही सीमित रहा।

नाराजगी या बहन की सियासी जमीन से किनारा

राहुल प्रयागराज से रविवार रात ही वाराणसी के लिए भी निकल गए। वहां भी उनका कोई राजनैतिक कार्यक्रम नहीं है। रात्रि विश्राम के बाद दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे। यह खामोशी और सिमटा हुआ दायरा तमाम सवालों और आशंकाओं को जन्म दे रहा है। सियासी गलियारे में इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। यह नाराजगी है अथवा प्रदेश को प्रियंका की झोली में डालने की ओर बड़ा कदम है। कहा तो यह भी जा रहा है कि राहुल अपनी बहन प्रियंका के कार्यक्षेत्र में दखलंदाजी नहीं करते हुए यूपी चुनाव से कन्नी काट रहे हैं। फिलहाल कांग्रेसी इस मसले पर खुलकर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं। उनका कहना है कि यह हाई कमान की रणनीति है।

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