त्रिनिदाद के राजदूत को त्रिवेणी की रेती ने किया अभिभूत, संगम का दर्शन व हनुमान जी का किया पूजन

बांध के नीचे बसी तंबुओं की नगरी हर किसी को आकर्षित करती है।

बांध के नीचे बसी तंबुओं की नगरी हर किसी को आकर्षित करती है। ऐसा ही हुआ भारत में त्रिनिदाद के राजदूत डॉ. रोजर गोपाल के साथ। संगम की रेती पर आकर अभिभूत हो गए। पत्नी अनीता व बच्चों एंड्रील और बहरीन के साथ उन्होंने शुक्रवार को संगम का दर्शन किया।

Publish Date:Fri, 15 Jan 2021 10:26 PM (IST) Author: Ankur Tripathi

प्रयागराज, जेएनएन। बांध के नीचे बसी तंबुओं की नगरी हर किसी को आकर्षित करती है। संतों व कल्पवासियों का जप-तप सबको अचंभित करता है। कुछ ऐसा ही हुआ भारत में त्रिनिदाद के राजदूत डॉ. रोजर गोपाल के साथ। वे संगम की रेती पर आकर अभिभूत हो गए। पत्नी अनीता व बच्चों एंड्रील और बहरीन के साथ उन्होंने शुक्रवार को संगम का दर्शन किया। प्रसाद स्वरूप संगम का जल एक केन में भरवाया। फिर बड़े हनुमान मंदिर गए। वहां योगगुरु स्वामी आनंद गिरि के मार्गदर्शन में पूजन व आरती किया। बड़े हनुमान जी की महिमा सुनकर गदगद हो गए। स्वामी आनंद गिरि ने उन्हें माघ मास, संगम तीरे लगने वाले मेला व कल्पवास का महत्व बताया। डॉ. रोजर ने मेला क्षेत्र का भ्रमण करके संतों व कल्पवासियों का जप-तप बच्चों को दिखाया।

डॉ. रोजर ने बताया कि उनके पूर्वज मूलत: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिला निवासी थे। दो सौ साल पहले त्रिनिदाद गए थे। पूर्वजों ने मजदूरी करके जीवनयापन किया। लेकिन, सनातन धर्म नहीं छोड़ा। आज वो भारत में त्रिनिदाद के राजदूत हैं। उनके घर में सारा काम व पर्व हिंदू संस्कृति के अनुरूप होता है। बताया कि उनके बच्चे भी सनातन संस्कृति से जुड़ें, इसके लिए उन्हें लेकर प्रयागराज आए हैं। यहां से शनिवार को काशी जाएंगे। डॉ. रोजर ने शाम को मठ बाघंबरी गद्दी में प्रसाद ग्रहण किया।

मेला में संस्थाओं को दे रहे फटे गद्दे

माघ मेला बसाने के लिए संस्थाओं को दी जा रही सुविधाओं में घटिया क्वालिटी के सामान दिए जा रहे हैं। इससे संतों और संस्था वालों ने नाराजगी जताई है।

इस बार सुविधाएं देने के लिए छह संस्थाओं को ठेका दिया गया है। संस्थाएं छह होने पर सामान वितरण में भी परेशानी हो रही है। अक्सर यह होता है कि जिस एजेंसी की पर्ची लेकर संस्था वाले पहुंचते है, उसका सामान नहीं मिलता है। एजेंसियां सामान समय से उपलब्ध नहीं करवा पा रही है, इसलिए मेला गोदाम में सुविधा के लिए रोजाना मारामारी हो रही है। इसमें कुछ एजेंसियों का सामान घटिया क्वालिटी के हैं। सामान लेने पहुंचे संस्था वालों ने बताया कि वहां से फटे हुए गद्दे और टूटी हुई चारपाई दी जा रही है। कई कुर्सियां भी टूटी हुई है। इसमें सबसे ज्यादा शिकायतें लल्लू जी एंड संस गोपाल दास की है। यह एजेंसियां सामान सप्लाई का बिल नया के लिए बनाएंगी और यहां पर घटिया सामान दे रही हैं। मेला अधिकारी विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि खराब सामान वहीं वापस कर दें। इन एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

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