Allahabad University: हॉस्टल खाली कराने पर भड़के छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री, विश्‍वविद्यालय प्रशासन को सुझाव भी दिया

इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय के हॉस्‍टल को कोविड-19 बनाने पर छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी ने विरोध जताया है।

Allahabad University छात्रनेता शिवम का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन शुल्क लेने के बावजूद हर साल किसी न किसी बहाने से केवल हॉस्टलों को ही खाली कराता है। उन्‍होंने सुझाव दिया कि विवि के अतिथि गृह और विभागों के साथ छात्रसंघ भवन को कोविड वार्ड में बदला जा सकता है।

Brijesh SrivastavaSun, 18 Apr 2021 10:07 AM (IST)

प्रयागराज, जेएनएन। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (इविवि) छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री शिवम सिंह ने हॉस्टलों को खाली कराकर कोविड वार्ड बनाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन को सुझाव भी दिए हैं। साथ ही इविवि प्रशासन को चुनौती भी दी है। आप भी जानें खबर के माध्‍यम से पूरा मामला क्‍या है।

केवल हॉस्टल ही निशाने पर क्यों

छात्रनेता शिवम का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन शुल्क लेने के बावजूद हर साल केवल हॉस्टलों को ही खाली कराता है। इससे आम छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हर वर्ष इविवि प्रशासन किसी न किसी बहाने से छात्रों को परेशान करने के लिए हॉस्टलों को खाली कराता है। जबकि, उनसे पूरी फीस वसूली जाती है।

छात्रनेता ने इविवि प्रशासन को दिए ये सुझाव

उन्होंने सुझाव दिया कि विवि के अतिथि गृह और विभागों को कोविड वार्ड में बदला जा सकता है। इसके अलावा छात्रसंघ भवन को भी कोविड वार्ड में बदला जा सकता है, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। वह सुचारू ढंग से अपनी पढ़ाई कर सकें। हॉस्टलों को खाली कर आखिर किधर जाएंगे।

इविवि प्रशासन को दिया अल्टीमेटम

शिवम ने चेतावनी भी दिया कि यदि विवि प्रशासन जबरन हॉस्टल खाली कराता है तो इसका व्यापक स्तर पर विरोध भी किया जाएगा। छात्रहित के विरोध में कोई फैसला मंजूर नहीं होगा। उन्होंने कहा इविवि के पास इतनी जगह है, भवन है तब हर बार केवल हॉस्टल ही क्यों खाली कराया जाता है।

अनशनकारी भी विरोध में उतरे

हॉस्टलों में अभी केवल नोटिस चस्पा हुई है। इसके बाद से विरोध शुरू हो गया है। छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर अनशनरत छात्रों ने भी अजय यादव सम्राट की अगुवाई में विरोध किया है। उनका कहना है इविवि प्रशासन केवल शिक्षकों और कर्मचारियों के बारे में सोच रहा है। जिनके बूते विश्वविद्यालय है, ऐसे छात्रों के बारे में कोई विचार ही नहीं किया जा रहा है।

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