Prayagraj Weather News: दिन में धूप व दोपहर बाद छाए बादलों ने की रिम‍झिम बारिश, जानें मौसम का हाल

Prayagraj Weather News बादलों से मौसम सुहावना हो गया और उमस से कुछ राहत मिली। आज का अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियम व न्यूनतम तापमान 26.3 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। मौसम विभाग ने कल यानी मंगलवार को भी आसमान में बादल छाए रहने का अनुमान लगाया है।

Brijesh SrivastavaMon, 21 Jun 2021 04:40 PM (IST)
मौसम में एक बार फिर बदलाव हुआ है। दोपहर तक सूर्य की किरणों से गर्मी थी फिर बादल छा गए।

प्रयागराज, जेएनएन। पिछले कुछ दिनों से आसमान में घने बादलों ने डेरा डाला था। सोमवार की सुबह से मौसम साफ रहा। आसमान में यदा-कदा बादल रहे। सूर्य की तल्‍ख किरणों ने दोपहर में उमस को बढ़ा दिया। दोपहर बाद एक बार फिर अचानक घने बादलों ने आसमान में डेरा जमा लिया और रिमझिम बारिश होने लगी। इससे मौसम फिर सुहावना हो गया है। कल यानी मंगलवार को भी आसमान में बादलों के छाए रहने के आसार हैं।

जानें आज का अधिकतम और न्‍यूनतम तापमान

पिछले कुछ दिनों से मानसूनी बादल लोगों को भिगो रहा था। कई दिन तक आसमान में घने बादल छाए रहे और कभी झमाझम तो कभी रिमझिम बारिश होती रही। इससे जहां शहर के कई इलाकों में जलभराव हो गया था, वहीं उमस भरी गर्मी से भी राहत मिली। यह क्रम रविवार तक जारी रहा। लगातार बारिश के कारण तापमान में भी कमी आई थी। सोमवार को दिन भर मौसम साफ होने के बाद करीब चार बजे आसमान में घने बादल छाने लगे और रि‍मझिम बारिश होने लगी। बादलों से मौसम सुहावना हो गया और उमस से कुछ राहत मिली। आज का अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियम व न्यूनतम तापमान 26.3 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। मौसम विभाग ने कल यानी मंगलवार को भी आसमान में बादल छाए रहने का अनुमान लगाया है।

पिछले दिनों की बारिश से कच्चे मकान की दीवार गिरी

प्रयागराज के यमुनापार स्थित जसरा नई बाजार में गौरव जायसवाल पुत्र परमानंद का पुराना पुश्तैनी कच्चा मकान है। गौरव दो कमरे के घर में गृहस्थी के साथ व्यापार का भी सारा सामान रखते हैैं। जर्जर दीवारें इधर कई दिनों से लगातार हो रही बारिश को नहीं झेल पाई, जिसके चलते अचानक घर की पीछे की दीवार पूरी तरह से गिर गई। अच्छा हुआ कि दीवार के पीछे भी अक्सर लोग बैठा करते थे तथा घर के पिछले कमरे में भी कोई नहीं था। जिससे एक बड़ी दुर्घटना होने से बच गई। दीवार गिरने से परिवार को भारी आॢथक क्षति का सामना करना पड़ा।

श्री पद्धति से करें धान की रोपाई

धान खरीफ मौसम की मुख्य फसल है। क्षेत्र सहित जनपद के अधिकांश किसान धान की खेती करते हैं। धान की फसल की रोपाई एवं निराई में अधिक संख्या में श्रमिकों की आवश्कता पड़ती है। ऐसे में किसानों को समय व लागत भी अधिक आती है। कम बीज, उर्वरक व ङ्क्षसचाई में अधिक उत्पादन वाली श्री पद्धति को अपना कर किसान अच्छी आमदनी कर सकते हैैं।

धान के पौधे रोपते समय सावधानी बरतें किसान

राजकीय कृषि बीज भंडार प्रभारी फूलपुर धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि श्री पद्धति में धान के पौधों को सावधानी पूर्वक रोपा जाता है। इस पद्धति से किसान 21 दिन के धान के नर्सरी के पौधों के मुकाबले मात्र 14 दिन के पौधों को समतल किए गए कीचड़ युक्त खेत में 25-25 सेमी की दूरी पर एक एक पौधे की रोपाई की जाती है। इस पद्धति से धान की रोपाई करने से खरपतवार नियंत्रण के लिए हाथ से चलाये जाने वाले कोनीवीडर का प्रयोग किया जाता है। इससे खेत की मिट्टी हल्की हो जाती है जिससे धान की फसल में ज्यादा कल्ले निकलते हैं और बालियां निकलने पर उसमें अधिक दाने पड़ते हैं। फलस्वरूप उत्पादन भी बढ़ जाता है।

 

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