इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शिक्षा सेवा अधिकरण बिना कोर्ट की अनुमति के गठित करने पर लगाई रोक

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शिक्षा सेवा अधिकरण बिना कोर्ट अनुमति गठित करने पर रोक लगाई।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शिक्षा सेवा अधिकरण की विधायी प्रक्रिया में हस्तक्षेप न करते हुए बिना कोर्ट की सहमति के अधिकरण गठित करने पर रोक लगा दिया है। साथ ही हड़ताल कर रहे प्रयागराज व लखनऊ के वकीलों से काम पर वापस लौटने की अपील की है।

Umesh TiwariWed, 03 Mar 2021 07:09 PM (IST)

प्रयागराज, जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शिक्षा सेवा अधिकरण की विधायी प्रक्रिया में हस्तक्षेप न करते हुए बिना कोर्ट की सहमति के अधिकरण गठित करने पर रोक लगा दिया है। साथ ही हड़ताल कर रहे प्रयागराज व लखनऊ के वकीलों से काम पर वापस लौटने की अपील की है। कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश से कहा है कि वह शैक्षिक व गैर शैक्षिक स्टॉफ के विचाराधीन मुकदमों के निस्तारण को गति देने के लिए अतिरिक्त पीठें बनाये। राज्य सरकार को बार एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित करके शिकायतों के निवारण का प्रयास करने का निर्देश दिया है। जीएसटी अधिकरण के मुद्दे पर लखनऊ पीठ मे सुनवाई के कारण कोई आदेश जारी नहीं किया है। 

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर व न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की खंडपीठ ने स्वत: कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण घोषित लॉकडाउन में भी हाई कोर्ट में न्यायिक कार्य सुचारू रूप से चला। लेकिन, शिक्षा सेवा अधिकरण की पीठ स्थापित करने के मुद्दे को लेकर देश के सबसे बड़े इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत हैं। इससे न्यायिक कार्य निस्तारण में अवरोध उत्पन्न हुआ है।

हाई कोर्ट ने शैक्षिक और गैर शैक्षिक स्टॉफ के पिछले 20 साल के मुकदमों का चार्ट देखा। इसके तहत इलाहाबाद हाई कोर्ट प्रयागराज में सेवा के 188632 केस दाखिल हुए, जिसमें से 33290 केस विचाराधीन हैं। इसी प्रकार लखनऊ पीठ में 55913 केस दाखिल हुए और 15003 विचाराधीन हैं।

शिक्षा सेवा अधिकरण कानून में लखनऊ में मुख्यालय और प्रयागराज में पीठ के गठन की व्यवस्था है। चेयरमैन को बैठने के दिन तय करने का विवेकाधिकार दिया गया है। इसके गठन को लेकर इलाहाबाद व लखनऊ के बार एसोसिएशन को शिकायत है। इसे लेकर अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत हैं। वकीलों के काम न करने से हाई कोर्ट के मुकदमों के निस्तारण में अवरोध उत्पन्न हुआ है। यह कहा गया कि अधिकरण के गठित होने से त्वरित निस्तारण का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

शिक्षण संस्थाओं के अधिक मुकदमे प्रयागराज में हैं। अधिक पीठें बैठाकर निस्तारण में तेजी लायी जा सकती है। न्यायिक कार्य बहिष्कार से कोर्ट के कीमती समय की बर्बादी हो रही है। इसी तरह 2019 में भी हड़ताल हुई थी। मुकदमों के निस्तारण में वकीलों की सहभागिता जरूरी है, इसलिए न्यायिक कार्य चालू रखने के लिए कोर्ट ने यह निर्देश जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश प्रयागराज व लखनऊ में अतिरिक्त पीठें बैठाकर मुकदमों के निस्तारण में तेजी लाएंगे। सरकार को बार एसोसिएशन से बात करनी होगी।

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