इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा- उत्तर प्रदेश में नाबालिग लड़कियों के लिए चिल्ड्रेन होम अपर्याप्त

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि यूपी में नाबालिग लड़कियों के लिए बनाए गए चिल्ड्रेन होम पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट ने ज्युडीशियल मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया है कि उनके समक्ष नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा व संरक्षा का केस आए तब उन्हें जुवेनाइल जस्टिस के अंतर्गत गर्ल्स चिल्ड्रेन होम में भेजें।

Umesh TiwariTue, 15 Jun 2021 10:30 PM (IST)
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में नाबालिग लड़कियों के लिए बनाए गए चिल्ड्रेन होम पर्याप्त नहीं हैं।

प्रयागराज, जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में नाबालिग लड़कियों के लिए बनाए गए चिल्ड्रेन होम पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट ने ज्युडीशियल मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया है कि उनके समक्ष नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा व संरक्षा का केस आए, तब उन्हें जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन) एक्ट 2015 के अंतर्गत चीफ वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के मार्फत गर्ल्स चिल्ड्रेन होम में भेजें। यह आदेश न्यायमूर्ति एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति शमीम अहमद की खंडपीठ ने काजल और अन्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।

याचिका दाखिल कर सीजेएम, आगरा के 12 जनवरी 2018 के आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें याची को नारी निकेतन भेजा गया था। मांग की गई थी कि याची आधार कार्ड के अनुसार बालिग है। इस कारण उसे पति के साथ रहने की अनुमति दी जाय। शैक्षणिक प्रमाणपत्र के अनुसार याची की जन्म की तारीख 10 मई 2004 है। कहा गया था कि यदि पति के साथ भेजना संभव न हो तो उसे गर्ल्स चिल्ड्रेन होम में भेजा जाए।

सरकार ने जवाबी हलफनामा में गर्ल्स चिल्ड्रेन होम को संख्या के अनुसार पर्याप्त नहीं होने का जिक्र किया था। कहा कि सरकार शीघ्र खुद अथवा एनजीओ के अधीन जल्द गर्ल्स चिल्ड्रेन होम खोलेगी। कोर्ट ने इस आधार पर याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि याचियों को उक्त 2015 के एक्ट के अंतर्गत सीडब्ल्यूसी के मार्फत गर्ल्स चिल्ड्रेन होम भेजा जाए ताकि एक्ट के तहत आदेश पारित किया जा सके।

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