Allahabad High Court: विपरीत धर्मों के बालिग जोड़े को अपनी पसंद का जीवन साथी चुनने का अधिकार

हाई कोर्ट ने कहा कि विपरीत धर्म से होने के बावजूद बालिग को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार है। उनके वैवाहिक संबंधों पर किसी को भी आपत्ति करने का अधिकार नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति एमके गुप्ता तथा न्यायमूर्ति दीपक वर्मा ने शिफा हसन की याचिका पर दिया

Ankur TripathiFri, 17 Sep 2021 02:45 PM (IST)
बालिग जोड़े के वैवाहिक जीवन में किसी को हस्तक्षेप का हक नहीं, सुरक्षा का निर्देश

प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विपरीत धर्मों के बालिग जोड़े की शादीशुदा जिंदगी में किसी के हस्तक्षेप करने पर रोक लगा दी है और गोरखपुर पुलिस को उनकी सुरक्षा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि उनके माता-पिता को भी दोनों के वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।

बालिग को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार

हाई कोर्ट ने कहा कि विपरीत धर्म से होने के बावजूद बालिग को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार है। उनके वैवाहिक संबंधों पर किसी को भी आपत्ति करने का अधिकार नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति एमके गुप्ता तथा न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खंडपीठ ने शिफा हसन व अन्य की याचिका पर दिया है। याची शिफा हसन ने हिंदू लडके से प्रेम के कारण शादी कर ली है और गोरखपुर के जिलाधिकारी से मुस्लिम से हिंदू धर्म अपनाने की अनुमति मांगी है।

जीवन पर खतरा देख सुरक्षा की लगाई गुहार

जिलाधिकारी ने पुलिस थाने से रिपोर्ट मांगी है। पुलिस रिपोर्ट में बताया गया कि लड़के के पिता शादी से राजी नहीं है मगर मां अपनाने के लिए तैयार है। लड़की के माता-पिता दोनों ही राजी नहीं है। जीवन से खतरे को देखते हुए युगल ने हाईकोर्ट की शरण ली है और सुरक्षा की गुहार लगाई है। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने यह कहा कि विपरीत धर्म से होने के बावजूद बालिग को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार है। उनके वैवाहिक संबंधों पर किसी को भी आपत्ति करने का अधिकार नहीं है। साथ ही हाई कोर्ट ने गोरखपुर जिले की पुलिस को इस बालिग जोड़े की सुरक्षा करने का भी निर्देश दिया है। उल्लेखनीय है कि अदालत से बरसों पहले आदेश जारी हो चुका है कि बालिक लड़के या लड़की को अपनी पसंद से शादी करने का अधिकार है भले ही वह विपरीत धर्म और समुदाय का जीवन साथी चुनते हैं और पुलिस को उनकी सुरक्षा करनी चाहिए। मगर इसके बावजूद अब भी समाज बालिगों पर अपनी पसंद थोपने का प्रयास करता है और पुलिस भी उदासीन रहती है।

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