Allahabad High Court ने कहा- अध्यापक की सेवाकाल में मौत पर वारिस को ग्रेच्युटी का हक है

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अहम निर्णय दिया। कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्त होने से पहले ही मौत पर अध्यापक के वारिसों को इस आधार पर ग्रेच्युटी देने से इन्कार नहीं किया जा सकता कि अध्यापक ने सेवानिवृत्ति विकल्प नहीं भरा था।

Brijesh SrivastavaSat, 25 Sep 2021 04:43 PM (IST)
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्ति से पूर्व ही मौत पर अध्‍यापक के ग्रेच्‍युटी मामले में आदेश दिया है।

प्रयागराज, जागरण संवाददाता। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि सेवानिवृत्त होने से पहले ही मौत पर अध्यापक के वारिसों को इस आधार पर ग्रेच्युटी देने से इन्कार नहीं किया जा सकता कि अध्यापक ने सेवानिवृत्ति विकल्प नहीं भरा था। कोर्ट ने कहा कि सेवा नियमावली के अनुसार तीन साल की सेवा करने वाले अध्यापक को प्राप्त अंतिम वेतन का छह गुना ग्रेच्युटी पाने का अधिकार है। सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़कर 62 किए जाने के बाद ग्रेच्युटी का विकल्प देने का निर्देश जारी किया गया। विकल्प सेवानिवृत्ति से एक वर्ष के भीतर देना था, किंतु विकल्प भरने से पहले ही मौत हो गई। ऐसे में ग्रेच्युटी का भुगतान करने से इन्कार नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने याचिका मंजूर की

कोर्ट ने याचिका मंजूर कर ली और तीन माह में ग्रेच्युटी की गणना कर निर्णय से याची को सूचित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने सुशीला यादव, अभिषेक चंद्र सिन्हा व माया देवी की याचिकाओं पर दिया है। सभी याची बेसिक स्कूल के अध्यापक के वारिस हैं। इन्हें यह कहते हुए ग्रेच्युटी देने से इन्कार कर दिया गया कि अध्यापक ने विकल्प नहीं दिया था।

कोर्ट ने यह कहा

कोर्ट ने उषा रानी केस में फैसले के हवाले से कहा कि मौत कभी भी हो सकती है। यदि विकल्प नहीं भरा गया है तो इस आधार पर ग्रेच्युटी देने से मना नहीं कर सकते। 1964 में नियमावली बनी। एडेड स्कूल अध्यापकों को ग्रेच्युटी देने की व्यवस्था की गई। पहले सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष थी, बढ़कर 60 वर्ष हुई। नौ नवंबर 11 को सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई है। 60 साल में सेवानिवृत्त होने वाले अध्यापकों को ग्रेच्युटी पाने का हक है। इसके लिए विकल्प भरना होगा। सवाल उठा पहले ही मौत हो गई तो विकल्प के अभाव में क्या ग्रेच्युटी से इन्कार कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि सेवाकाल में मृत्यु की दशा में ग्रेच्युटी देने से इन्कार नहीं किया जा सकता।

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