इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा- विपरीत धर्मों के बालिग जोड़े को अपनी पसंद का जीवन साथी चुनने का अधिकार

यह आदेश न्यायमूर्ति एमके गुप्ता तथा न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खंडपीठ ने शिफा हसन व अन्य की याचिका पर दिया है। याची शिफा हसन ने हिंदू लडके से प्रेम के कारण शादी कर ली है और जिलाधिकारी से मुस्लिम से हिंदू धर्म अपनाने की अनुमति मांगी है।

Brijesh SrivastavaFri, 17 Sep 2021 03:14 PM (IST)
हाई कोर्ट ने कहा कि बालिग जोड़े के वैवाहिक जीवन में किसी को हस्तक्षेप का हक नहीं है।

प्रयागराज, जेएनएन। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विपरीत धर्मों के बालिग जोड़े की शादीशुदा जिंदगी में किसी के हस्तक्षेप करने पर रोक लगा दी है और पुलिस को उनकी सुरक्षा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि उनके माता-पिता को भी दोनों के वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि विपरीत धर्म होने के बावजूद बालिग को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार है। उनके वैवाहिक संबंधों पर किसी को भी आपत्ति करने का अधिकार नहीं है।

शिफा हसन व अन्‍य की याचिका पर दिया आदेश

यह आदेश न्यायमूर्ति एमके गुप्ता तथा न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खंडपीठ ने शिफा हसन व अन्य की याचिका पर दिया है। याची शिफा हसन ने हिंदू लडके से प्रेम के कारण शादी कर ली है और जिलाधिकारी से मुस्लिम से हिंदू धर्म अपनाने की अनुमति मांगी है। जिलाधिकारी ने पुलिस थाने से रिपोर्ट मांगी है।

खतरे को देखते हुए युगल ने हाई कोर्ट की शरण ली

पुलिस रिपोर्ट में लड़के के पिता शादी से राजी नहीं है किंतु मां अपनाने को राजी है। लड़की के माता-पिता दोनों ही राजी नहीं है। जीवन को खतरे को देखते हुए युगल ने हाई कोर्ट की शरण ली है और सुरक्षा की गुहार लगाई है।

 

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