Allahabad High Court : गंगा किनारे शव दफनाने की परंपरा पर हाईकोर्ट का हस्‍तक्षेप से इंकार

Allahabad High Court याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि याची गंगा किनारे विभिन्न समुदायों में अंतिम संस्कार को लेकर परंपराओं और रीति-रिवाज पर शोध व अध्ययन करे। इसके बाद नए सिरे से बेहतर याचिका दाखिल कर सकता है।

Rajneesh MishraFri, 18 Jun 2021 08:27 PM (IST)
हाई कोर्ट ने याचिका पर हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया है।

प्रयागराज,जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रयागराज में गंगा किनारे घाटों पर शवों को दफनाने से रोकने और दफनाए गए पार्थिव शरीरों का दाह संस्कार करने की मांग में जनहित याचिका निस्तारित कर दी गई। हाई कोर्ट ने याचिका पर हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया है। कहा कि याची ने गंगा किनारे निवास करने वाले लोगों के अंतिम संस्कार की परिपाटी व चलन को लेकर कोई शोध नहीं किया। याची को यह याचिका वापस लेकर नए सिरे से दाखिल करने के लिए छूट देने के अलावा कोई अन्य आदेश नहीं दे सकते।

याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि याची गंगा किनारे विभिन्न समुदायों में अंतिम संस्कार को लेकर परंपराओं और रीति-रिवाज पर शोध व अध्ययन करे। इसके बाद नए सिरे से बेहतर याचिका दाखिल कर सकता है। मुख्य न्यायमूर्ति संजय यादव व न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई की। याचिका में मांग की गई थी कि बड़ी संख्या में गंगा के किनारे दफनाए गए शवों को निकालकर उनका दाह संस्कार किया जाय। इसके साथ ही गंगा के किनारे शवों को दफनाने से रोका जाय। कोर्ट ने कहा कि याचिका देखने से ऐसा लगता है कि याची ने विभिन्न समुदायों की परंपराओं और रीति-रिवाजों का अध्ययन नहीं किया है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

याची ने गंगा किनारे निवास करने वाले लोगों के अंतिम संस्कार की परिपाटी व चलन को लेकर कोई शोध नहीं किया। याची को यह याचिका वापस लेकर नए सिरे से दाखिल करने के लिए छूट देने के अलावा अन्य आदेश नहीं दे सकते।

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