इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अलीगढ़ की सोशल वर्कर की धोखाधड़ी के केस में अग्रिम जमानत की मंजूर

अधिवक्ता तनिषा मुनीर का तर्क था कि प्रगति एक समाजसेविका है। उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से धोखाधड़ी और फर्जी लोक सेवक का कार्य करने के आरोप साबित नहीं होता। याची ने समाजसेविका होने के कारण प्रोत्साहन हेतु प्रमाणपत्र जारी किया था

Ankur TripathiSat, 19 Jun 2021 11:49 PM (IST)
हाई कोर्ट ने अलीगढ़ की सोशल वर्कर प्रगति चौहान की धोखाधड़ी के मामले में अग्रिम जमानत मंजूर कर ली

प्रयागराज, जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अलीगढ़ की सोशल वर्कर प्रगति चौहान की धोखाधड़ी के एक मामले में अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने दिया है। आरोपित के विरुद्ध क्वार्सी थाने में धोखाधड़ी व फर्जी लोक सेवक बनकर काम के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

न्यायालय ने सशर्त अग्रिम जमानत मंजूर कर ली

अधिवक्ता तनिषा मुनीर का तर्क था कि प्रगति एक समाजसेविका है। उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से धोखाधड़ी और फर्जी लोक सेवक का कार्य करने के आरोप साबित नहीं होता। याची ने समाजसेविका होने के कारण प्रोत्साहन हेतु प्रमाणपत्र जारी किया था न कि प्रशंसा पत्र। वह समाजसेवा का काम करती है इसलिए बहुत से लोगों को यह अच्छा नहीं लगता। शिकायतकर्ता को कोई अधिकार नहीं है। सरकारी वकील ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता टीबी सेंटर का जिला कार्यक्रम समन्वयक है, इसलिए उसे शिकायत करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, उन्होंने इस बात का विरोध नहीं किया कि याची पर किसी का आर्थिक नुकसान करने का आरोप नहीं है। न्यायालय ने सशर्त अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है।

रेलवे ग्रुप डी भर्ती आवेदन निरस्त करने पर जवाब तलब

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने रेलवे में ग्रुप डी की भर्ती को लेकर रिक्रूटमेंट एप्लीकेशन साफ्टवेयर की कार्यशैली की विस्तृत जानकारी मांगी है। कैट ने यह आदेश राकेश कुमार यादव व अन्य की याचिका पर अधिवक्ता सिद्धार्थ मिश्र को सुनकर दिया है।

याचिका के अनुसार रेलवे भर्ती सेल ने ग्रुप डी के 1.3 लाख पदों के लिए भर्ती निकाली। हजारों अभ्यॢथयों ने आवेदन किया। बाद में रेलवे भर्ती सेल ने कई अभ्यॢथयों का आवेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि सही ढंग से फोटो और हस्ताक्षर नहीं हैं। अभ्यॢथयों ने रेलवे सेल में शिकायत की तो 44 हजार अभ्यॢथयों के आवेदन साफ्टवेयर में गड़बड़ी बताकर दोबारा स्वीकार कर लिए गए। याचियों का कहना हैं एक ही फोटो रेलवे ग्रुप डी की भर्ती में निरस्त है जबकि आरआरबी एनटीपी में सही है।

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