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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका

प्रयागराज, जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी से लोकसभा चुनाव जीतने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। पीएम मोदी के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका बीएसएफ से बर्खास्त जवान तथा समाजवादी पार्टी के घोषित प्रत्याशी तेज बहादुर यादव ने दायर की थी। नामांकन से पहले तेज बहादुर यादव का पर्चा खारिज हो गया था। 

हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी लोकसभा सीट से निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची को चुनौती देने का अधिकार नहीं है। वह न तो वाराणसी का मतदाता है और न लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी रहा है। उसे पीड़ित पक्ष नहीं कहा जा सकता। न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने 58 पृष्ठ के अपने फैसले में कहा कि याची तेजबहादुर को 24 घंटे में आपत्ति दाखिल करने का अधिकार था किंतु याचिका में यह आधार लिया गया है कि उसे आपत्ति करने का 24 घंटे का समय नहीं दिया गया।

दरअसल, वाराणसी सीट से नामांकन दाखिल करने वाले बीएसएफ के बर्खास्त सिपाही तेज बहादुर यादव ने पीएम मोदी के निर्वाचन को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की थी। याचिका में तेज बहादुर ने पीएम मोदी का चुनाव रद करने की मांग की थी। चुनाव अधिकारी पर आरोप लगाया कि पीएम मोदी के दबाव में गलत तरीके से चुनाव अधिकारी ने नामांकन रद किया था, जबकि गलत तथ्य देने व सही तथ्य छिपाने के आधार पर नामांकन निरस्त किया गया था। तेज बहादुर को समाजवादी पार्टी ने प्रत्याशी बनाया था।

याचिका पर कई तारीखों पर चली बहस और सभी पक्ष सुनने के बाद 23 अक्टूबर को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। पीएम मोदी के वरिष्ठ अधिवक्ता एडिशनल सालीसिटर जनरल एवं लॉ कमीशन के सदस्य सत्यपाल जैन के मुताबिक कोर्ट ने उनकी इस दलील को मानते हुए तेज बहादुर यादव की याचिका खारिज कर दी है कि वह वाराणसी लोकसभा क्षेत्र के वोटर नहीं हैं। साथ ही नामांकन खारिज होने के बाद वह वाराणसी सीट से प्रत्याशी भी नहीं थे। लिहाजा निर्वाचन को वही व्यक्ति चुनौती दे सकता है जो कि वाराणसी लोकसभा क्षेत्र का वोटर और प्रत्याशी भी रहा हो।

चुनाव याचिका में तेज बहादुर यादव का आरोप था कि उनका नामांकन सेना से बर्खास्त होने के चलते रद किया गया है, जबकि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अगर किसी सरकारी कर्मचारी को उसके पद से बर्खास्त किया जाता है तो वह पांच साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकता, जब तक कि चुनाव आयोग उस व्यक्ति को इस बात का सर्टिफिकेट न जारी करे कि देशद्रोह और भ्रष्टाचार के आरोप में उसे बर्खास्त नहीं किया गया है। पीएम मोदी के अधिवक्ता के मुताबिक चुनाव आयोग से सर्टिफिकेट न लेने के कारण ही तेज बहादुर यादव का नामांकन रद किया गया था। कोर्ट ने चुनाव अधिकारी की कार्रवाई की विधिसम्मत माना और चुनाव याचिका की पोषणीयता पर की गयी आपत्ति को स्वीकार करते हुए याचिका बलहीन मानते हुए खारिज कर दी है। 

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