Allahabad High Court ने जेल बंदी को पिता की तेरहवीं में शामिल होने की दी अनुमति

हाईकोर्ट ने देवरिया निवासी उपेन्द्र राय को पिता की तेरहवीं में शामिल होने की अनुमति दे दी है। देवरिया जिला जेल में बंद याची के पिता की लंबी बीमारी के बाद छह सितंबर को मौत हो गई थी। हाई कोर्ट ने कहा है कि सीजेएम उचित आदेश जारी करे

Ankur TripathiFri, 17 Sep 2021 03:37 PM (IST)
पुलिस अभिरक्षा में कार्यक्रम में शामिल करा कर जेल वापस लाने का निर्देश

प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया कोतवाली क्षेत्र के निवासी उपेन्द्र राय को पिता की तेरहवीं में शामिल होने की अनुमति दे दी है। देवरिया जिला जेल में बंद याची के पिता की लंबी बीमारी के बाद छह सितंबर को मौत हो गई थी। हाई कोर्ट ने कहा है कि सीजेएम उचित आदेश जारी करें और याची को जेल से 17 सितंबर पुलिस अभिरक्षा में कार्यक्रम में ले जाया जाए और फिर 19 सितंबर को वापस जेल में लाया जाए। इस दौरान उसके साथ सरकारी खर्चे पर दो पुलिस कांस्टेबल रखें जाए। कोर्ट ने आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट भी मांगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति नाहिद आरा मुनीस ने उपेन्द्र राय की शार्ट टर्म जमानत अर्जी पर दिया है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों हाई कोर्ट ने प्रयागराज में करवरिया बंधुओं को बेटी की शादी में शामिल होने और इसके पहले अपनी मां की अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए भी शार्ट टर्म जमानत प्रदान की थी। 

गांव सभा की जमीन से एक माह में अतिक्रमण हटाने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तहसीलदार शाहगंज अभिषेक कुमार राय को गांव सभा की जमीन से अवैध अतिक्रमण हटाने के 28 सितंबर 2020 को दिए आदेश का एक माह में पालन करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने जौनपुर की शाहगंज तहसील के डोमनपुर गांव के निवासी अरुण कुमार यादव की अवमानना याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता आर एन यादव व अभिषेक यादव ने बहस की।इनका कहना था कि जनहित याचिका पर कोर्ट ने सहायक कलेक्टर को राजस्व संहिता की धारा 67के तहत कार्रवाई करने और अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था।जिसकी जानकारी के बावजूद आदेश पर अमल नहीं किया गया। गांव के एक दर्जन से अधिक लोगों पर खेल मैदान, भीटा, पंचायत भवन, स्कूल की जमीन हथियाने का आरोप है जिसे कानूनी कार्यवाही कर हटाया जाना है। हाई कोर्ट ने कहा कि प्रथमदृष्टया अवमानना का केस बनता है मगर आदेश पालन करने का एक अतिरिक्त मौका दिया जाना चाहिए।

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